हसीना के हटने से पहले ही तय हो गया था यूनुस का नाम, पत्रकार ने कराई थी गुप्त बातचीत, बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन पर नया खुलासा

https://admin.thefrontfaceindia.in/uploads/454144817_bangladesh-power-shift-secret-talks-yunus-hasina.jpg

ढाका: बांग्लादेश में वर्ष 2024 के दौरान हुए बड़े राजनीतिक उलटफेर और शेख हसीना सरकार के पतन को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार रहे मोहम्मद यूनुस के पूर्व प्रेस सचिव शफीकुल आलम के अनुसार, हसीना के देश छोड़ने से दो दिन पूर्व ही प्रदर्शनकारी छात्रों और मोहम्मद यूनुस के मध्य सत्ता हस्तांतरण को लेकर गुप्त संवाद स्थापित हो चुका था।

 

 

इस पूरे घटनाक्रम में अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी 'एएफपी' (AFP) के पत्रकार कादरुद्दीन शिशिर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।



खुफिया तंत्र से छिपाकर कराई गई थी बातचीत

 

 

शफीकुल आलम के मुताबिक, उस समय आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं को नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस तक अपना संदेश पहुंचाने के लिए एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी, जिस पर पूरी तरह भरोसा किया जा सके। पत्रकार कादरुद्दीन शिशिर ने इस कड़ी को जोड़ने में मदद की।

 

 

यह बातचीत बांग्लादेशी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की नजरों से पूरी तरह गोपनीय रखी गई थी। आलम के अनुसार, यदि उस समय सुरक्षा तंत्र को इसकी भनक लग जाती, तो शिशिर सहित पूरी मीडिया टीम गंभीर जोखिम में पड़ सकती थी। इस शुरुआती संपर्क के बाद आंदोलन के मुख्य समन्वयकों में शामिल नाहिद इस्लाम ने यूनुस के समक्ष अंतरिम सरकार के प्रमुख का पद संभालने का औपचारिक प्रस्ताव रखा, जिसे बाद में लागू किया गया।



आरक्षण विवाद से शुरू होकर तख्तापलट तक का सफर

 

 

बांग्लादेश में इस अशांति की शुरुआत 2024 में सरकारी नौकरियों में प्रचलित आरक्षण प्रणाली के विरोध से हुई थी। छात्र 1971 के मुक्ति संग्राम सेनानियों के आश्रितों को मिलने वाले 30% कोटे को समाप्त कर मेधा-आधारित चयन प्रक्रिया की मांग कर रहे थे।

 

 

धीरे-धीरे यह छात्र आंदोलन व्यापक सरकार विरोधी लहर में तब्दील हो गया। प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक झड़पों और सरकारी कार्रवाई में संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1,400 लोगों की जान गई। भारी दबाव और अशांति के बीच 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को पद छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ा।



अंतरिम दौर के बाद तारिक रहमान के हाथों में कमान

 

 

यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार ने देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली के लिए 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव आयोजित कराए। इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 300 संसदीय सीटों में से 209 पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 17 फरवरी 2026 को तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, जिसके साथ ही अंतरिम प्रशासन समाप्त हुआ।



शेख हसीना की वतन वापसी की घोषणा और राजनयिक तनाव

 

 

इधर, भारत में शरण लिए हुए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में घोषणा की है कि वे दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा रहमान सरकार से गिरफ्तारी, उत्पीड़न या जान के खतरे की आशंका के बावजूद वे अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगी।

 

 

दूसरी ओर, ढाका की नई सरकार लगातार नई दिल्ली से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। भारत द्वारा तारिक रहमान को ब्रिक्स सम्मेलन और द्विपक्षीय वार्ता के आमंत्रण भेजे जाने के बावजूद, इस प्रत्यर्पण विवाद के कारण दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में गतिरोध बना हुआ है।

 

इसे भी पढ़ें

Latest News