‘पाकिस्तान भारत का बड़ा भाई है...’ अजमेर के प्रिंसिपल की फिसली जुबान, कहा- आजादी मिली तो तीन नेता थे - गांधी, जिन्ना और अंबेडकर; नेहरु का नाम ही नहीं

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ब्यावर (राजस्थान)। ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में आयोजित राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में इतिहास, राजनीति और समाज को लेकर नए दृष्टिकोण सामने आए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और अजमेर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य, मनोज बेहरवाल ने भारत की आजादी और तत्कालीन नेतृत्व को लेकर अपने संबोधन में कई विवादित बयान दिए।

 

प्राचार्य बेहरवाल ने 14 और 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि के घटनाक्रम को एक अलग नजरिए से पेश किया। उन्होंने कहा कि विश्व पटल पर पाकिस्तान का नाम 14 अगस्त को ही अंकित हो गया था, जबकि भारत का उदय 15 अगस्त की सुबह लगभग 10:30 बजे हुआ। इसी तर्क के आधार पर उन्होंने कहा कि समय के अंतर के कारण पाकिस्तान हमसे 12 घंटे बड़ा है और इस नाते वह हमारा 'बड़ा भाई' कहलाया। उसे पहले तैयार किया गया, उसकी खुशियाँ मनाई गईं, जबकि भारत अस्तित्व में उसके बाद आया।

 

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद भारत ने ही पाकिस्तान को संबल देने के लिए 45 करोड़ रुपये की मदद दी थी, लेकिन पाकिस्तान ने उस पूंजी का उपयोग रचनात्मक कार्यों के बजाय आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया।

 

गांधी, जिन्ना और अंबेडकर: 'जागने और सोने' का दर्शन

 

बेहरवाल ने आजादी के समय की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस दौर में केवल तीन ही कद्दावर नेता थेमहात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना और डॉ. बी.आर. अंबेडकर। उन्होंने इस सूची से नेहरू का नाम अनुपस्थित बताया।

 

उन्होंने एक विदेशी पत्रकार के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि जब पत्रकार आधी रात को अंबेडकर के पास पहुँचा, तो वे काम कर रहे थे। अंबेडकर का जवाब था, "गांधी और जिन्ना के समाज जाग चुके हैं, इसलिए वे सो रहे हैं। मेरा समाज अभी सोया हुआ है, इसलिए मुझे जागना पड़ रहा है।" बेहरवाल ने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) का मूल हिस्सा बताया।

 

भारतीय राजनीति और 'IKS' का नया युग

 

प्राचार्य ने वर्तमान परिदृश्य पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि 2014 के बाद देश में एक बड़ा परिवर्तन आया है। उनके अनुसार,  अब पहली बार भारतीय राजनीति का जुड़ाव 'भारतीय ज्ञान परंपरा' से हुआ है। इससे पूर्व की राजनीति समाज को विभाजित करने का कार्य करती थी।  उन्होंने सुझाव दिया कि 'IKS' (Indian Knowledge System) का नाम बदलकर 'BKS' (Bharatiya Knowledge System) किया जाना चाहिए।

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