वाराणसी का जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर शुक्रवार को उस समय छावनी में तब्दील हो गया, जब जिला जज को एक अज्ञात ईमेल के जरिए कचहरी को बम से उड़ाने की धमकी मिली। गुरुवार की देर रात (लगभग 1:10 AM) आए इस धमकी भरे संदेश ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस ने पूरे परिसर को खाली करा लिया और व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया।
जनपद न्यायाधीश संजीव शुक्ला को धमकी मिलने के तुरंत बाद पुलिस प्रशासन और 'सेंट्रल बार एसोसिएशन' को सूचित किया गया। सुबह होते ही डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने मोर्चा संभाल लिया।
कचहरी परिसर के सभी प्रवेश और निकास द्वारों को सील कर दिया गया है। करीब 200 पुलिसकर्मियों की टीम, बम निरोधक दस्ता (BDDS) और डॉग स्क्वॉड के साथ एक-एक कोने की तलाशी ले रही है।
सुरक्षा कारणों से आज होने वाली सभी अदालती कार्यवाहियों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। वकीलों और वादकारियों से परिसर खाली करने की अपील की गई, जिसके बाद न्यायालय परिसर पूरी तरह खाली नजर आया। आज के मुकदमों में सामान्य तारीखें (Next Date) दे दी गई हैं। पुलिस की साइबर सेल सक्रिय हो गई है। जिस ईमेल आईडी से धमकी भेजी गई है, उसके आईपी एड्रेस और मूल स्थान को ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।
पहले भी हो चुके हैं धमाके
वाराणसी कचहरी पहले भी आतंकी हमलों का निशाना बन चुकी है। 23 नवंबर 2007 को कचहरी परिसर में हुए भीषण बम धमाकों की यादें आज भी ताज़ा हैं। पूर्व बार अध्यक्ष विवेक शंकर तिवारी ने इस खतरे की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि 2007 के धमाके हम भूले नहीं हैं, इसलिए ऐसी किसी भी सूचना को हल्के में लेना घातक हो सकता है। पुलिस और प्रशासन का सहयोग करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
प्रशासन की अपील
डीसीपी वरुणा ने जनता और वकीलों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। फिलहाल पूरे परिसर को खंगाला जा रहा है और सुरक्षा बढ़ा डी गई है।