रक्तरंजित बांग्लादेश: चुनाव से पहले सुलग रही नफरत की आग, एक और हिंदू को जिंदा जलाया, 40 दिनों में 10 हत्याएं, दहशत के साये में हिंदू

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ढाका। पड़ोसी देश बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले सांप्रदायिक हिंसा का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। नफरत और कट्टरपंथ की आग अब निर्दोष नागरिकों के घरों और गैरेज तक पहुँच चुकी है। ताजा मामला नरसिंदी जिले से सामने आया है, जहाँ चंचल भौमिक नाम के एक हिंदू युवक को सोती हुई अवस्था में जिंदा जलाकर मार दिया गया।

 

साजिश के तहत बर्बर हत्या

 

चंचल भौमिक अपने परिवार का एकमात्र सहारा थे। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, घटना उस समय हुई जब चंचल अपने गैरेज के भीतर सो रहे थे। हमलावरों ने पहले गैरेज का शटर बाहर से बंद किया, फिर पेट्रोल डालकर उसमें आग लगा दी। इस जघन्य कत्ल ने एक बार फिर वहां रह रहे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

·         अनाथ हुआ परिवार: चंचल के पीछे उनकी बीमार माँ, एक दिव्यांग बड़ा भाई और एक छोटा भाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह बेहद सीधे स्वभाव के व्यक्ति थे और उनकी किसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी।

 

40 दिनों का डरावना रिकॉर्ड

 

बांग्लादेश में पिछले 40 दिनों का रिकॉर्ड अत्यंत डरावना रहा है। चुनावी शोर के बीच अब तक 10 हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है।

 

·         नरसिंदी में दोहराव: इसी जिले में 5 जनवरी को दुकानदार शरत मणि चक्रवर्ती की गला रेतकर हत्या की गई थी।

 

·         मीडिया पर हमला: पत्रकार राणा प्रताप बैरागी को उनकी फैक्ट्री के बाहर सरेआम गोलियों से भून दिया गया।

 

·         ईशनिंदा का ढोंग: दीपू दास नामक युवक को झूठे ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और बाद में उसे आग के हवाले कर दिया।

 

भड़काऊ राजनीति: 'संसद में हिंदुओं की जगह नहीं'

 

हिंसा की इस आग में घी डालने का काम वहां के कट्टरपंथी नेता कर रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार अफजल हुसैन ने हाल ही में एक चुनावी सभा में खुलेआम जहर उगलते हुए कहा कि "मुस्लिम बहुल देश की संसद में गैर-मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।"

 

हुसैन ने संविधान को चुनौती देते हुए 'कुरान आधारित शासन' और 'हाथ काटने' जैसी मध्ययुगीन सजाओं को लागू करने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयानों से कट्टरपंथी तत्वों को खुली छूट मिल रही है, जिसके कारण निर्दोष हिंदू निशाने पर हैं।

 

बेबस अल्पसंख्यक, मौन प्रशासन

 

नरसिंदी से लेकर जेसोर तक, हिंदुओं की संपत्तियों को लूटना, उन्हें शारीरिक क्षति पहुँचाना और उनकी आवाज दबाना एक पैटर्न बनता जा रहा है। चंचल भौमिक की हत्या महज एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि धार्मिक नफरत से प्रेरित एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा नजर आती है।

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