"यह सीधा युद्ध का एलान है": मादुरो की गिरफ्तारी पर भड़के न्यूयॉर्क के मेयर, रो खन्ना ने भी ट्रम्प प्रशासन की कार्रवाई को बताया अराजकता

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-      ट्रम्प का वेनेजुएला पर कब्जे का दावा, इलॉन मस्क देंगे मुफ्त इंटरनेट: मादुरो के 'थम्स अप' ने सोशल मीडिया पर छेड़ी नई बहस

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सीधे तौर पर एक्ट ऑफ वॉरकरार दिया। उनका कहना है कि किसी संप्रभु देश के मौजूदा राष्ट्रपति को इस तरह अगवा करना न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून, बल्कि अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था का भी उल्लंघन है। ममदानी ने चेताया कि इससे दुनिया में खतरनाक परंपरा की शुरुआत हो सकती है।

 

इस कार्रवाई पर अमेरिका के भीतर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने ट्रम्प प्रशासन की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि अगर भविष्य में रूस इसी तर्क के आधार पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को गिरफ्तार कर ले, तो वैश्विक व्यवस्था का क्या होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई विश्व राजनीति को अराजकता की ओर धकेल सकती है और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के लिए गंभीर चुनौती है।

 

घटनाक्रम के मुताबिक, 2 जनवरी की रात अमेरिकी सैनिकों ने वेनेजुएला में सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दिया। अमेरिकी कमांडो हेलीकॉप्टरों के जरिए राष्ट्रपति भवन में उतरे और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया। इसके बाद दोनों को अमेरिका लाया गया, जहां उन्हें न्यूयॉर्क के एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। अमेरिकी एजेंसियों ने दावा किया है कि मादुरो पर हथियारों और ड्रग्स से जुड़े गंभीर आरोप हैं और इन्हीं मामलों में उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा।

 

वेनेजुएला के भीतर सत्ता संतुलन तेजी से बदला है। देश के सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर जिम्मेदारी संभालने का निर्देश दिया है। रोड्रिग्ज ने अस्थायी रूप से कार्यभार संभाल लिया है, जबकि राजधानी कराकास समेत कई शहरों में तनावपूर्ण शांति का माहौल है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस फैसले के बाद सरकार समर्थक और विरोधी गुटों के बीच टकराव की आशंका बनी हुई है।

 

मादुरो की हिरासत से जुड़ी तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें वे मैनहैटन में अमेरिकी अधिकारियों की निगरानी में नजर आते हैं। एक दृश्य में वे अधिकारियों से हैप्पी न्यू ईयरकहते दिखे, जबकि कुछ तस्वीरों में वे न्यूयॉर्क के स्टुअर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस पर अपनी पत्नी के साथ दिखाई दिए। एक अन्य तस्वीर में मादुरो अमेरिकी अधिकारियों के बीच थम्स अप करते हुए नजर आए, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी बहस को जन्म दे दिया। अमेरिकी कब्जे में लिए जाने के बाद उन्हें कुछ समय के लिए USS इवो जीमा युद्धपोत पर भी रखा गया।

 

पूरे ऑपरेशन की टाइमलाइन भी सामने आई है। 2 जनवरी की रात 10:46 बजे राष्ट्रपति ट्रम्प ने मादुरो को पकड़ने के मिशन को मंजूरी दी। 3 जनवरी तड़के 2:48 बजे अमेरिकी सेना ने हवाई हमले शुरू किए और कुछ ही मिनटों बाद कमांडो राष्ट्रपति भवन में दाखिल हो गए। 3:29 बजे ऑपरेशन पूरा होने की घोषणा हुई। सुबह 11 बजे ट्रम्प ने वेनेजुएला पर अमेरिकी कब्जे का दावा किया और शाम तक मादुरो को बेड़ियों में न्यूयॉर्क लाया गया, जहां उन्हें MDC जेल में भेज दिया गया।

 

इसी बीच, टेक अरबपति इलॉन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक ने वेनेजुएला में 3 फरवरी तक मुफ्त ब्रॉडबैंड इंटरनेट उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान राजधानी कराकास के कई इलाकों में बिजली कटौती के चलते इंटरनेट सेवा बाधित हुई। स्थानीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कई क्षेत्रों में इंटरनेट पूरी तरह ठप है।

 

गौरतलब है कि वेनेजुएला पहले से ही ऑनलाइन सेंसरशिप की समस्या से जूझता रहा है। मादुरो सरकार के कार्यकाल में फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कई बार अस्थायी रूप से बंद किए गए थे। मौजूदा हालात में इंटरनेट और सूचना पर नियंत्रण का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है।

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