सहालग से पहले सोने-चांदी पर महंगाई की मार: चांदी 3.44 लाख रुपए पार, सोना भी हुआ बेकाबू, डॉलर के सामने रुपया पस्त, जानें क्यों बेतहाशा महंगी हो रही हैं कीमती धातुएं

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नई दिल्ली। भारतीय सराफा बाजार में आज एक ऐसा भूचाल आया है जिसने निवेश के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 27 जनवरी को सोने और चांदी की कीमतों ने अपने अब तक के सबसे उच्चतम स्तर (All-Time High) को छू लिया है। यह तेजी इतनी जबरदस्त है कि महज जनवरी के 27 दिनों के भीतर ही चांदी की कीमत में 1 लाख रुपये से अधिक का इजाफा हो गया है।

 

आज शाम को कारोबार बंद होने तक एक किलो चांदी की कीमत ₹3,44,564 पर पहुंच गई। सुबह जब बाजार खुला था, तब यह ₹3,42,507 पर थी, लेकिन दिनभर की उठापटक के बाद इसमें ₹26,859 की भारी बढ़त दर्ज की गई। अगर हम पिछले साल के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर 2025 से तुलना करें, तो उस समय चांदी ₹2,30,420 प्रति किलो थी। यानी सिर्फ 27 दिनों में चांदी ₹1,14,144 महंगी हो चुकी है।

 

सोना भी नहीं रहा पीछे: ₹1.58 लाख का नया स्तर

 

सोने की कीमतों ने भी आम आदमी और निवेशकों को चौंका दिया है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव आज ₹4,591 की बढ़त के साथ ₹1,58,901 पर बंद हुआ। साल की शुरुआत में सोना ₹1,33,195 के स्तर पर था, जिसमें अब तक ₹25,706 की वृद्धि हो चुकी है।

 

आखिर क्यों लग रही है कीमतों में आग?

 

विशेषज्ञों ने इस अप्रत्याशित तेजी के पीछे तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:

 

1. वैश्विक तनाव और 'ग्रीनलैंड' विवाद:

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दिखाई जा रही सख्त जिद और यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। ट्रेड वॉर (व्यापार युद्ध) के इसी डर से निवेशक शेयर बाजार के बजाय सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं।

 

2. रुपए की ऐतिहासिक कमजोरी:

 

भारतीय मुद्रा (रुपया) डॉलर के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर ₹91.10 पर पहुंच गई है। रुपए के कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोना खरीदना भारत के लिए काफी महंगा हो गया है, जिसकी वजह से घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं।

 

3. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी:

 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समेत दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित करने के लिए भारी मात्रा में सोने का स्टॉक जमा कर रहे हैं। सप्लाई कम और डिमांड अधिक होने के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

 

चांदी में तेजी के औद्योगिक कारण

 

चांदी अब केवल आभूषणों तक सीमित नहीं रही है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में चांदी का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में बढ़ गया है। साथ ही, अमेरिकी टैरिफ के डर से बड़ी कंपनियां भविष्य की कमी से बचने के लिए अभी से चांदी का स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे इसकी कीमतें बेलगाम हो गई हैं।

 

भविष्य की चेतावनी: क्या सोना ₹1.90 लाख तक जाएगा?

 

मार्केट एक्सपर्ट्स और रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी का मानना है कि यदि मध्य पूर्व का तनाव और अमेरिकी टैरिफ नीतियां इसी तरह बनी रहीं, तो साल 2026 के अंत तक सोना ₹1,90,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार कर सकती है।

 

ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह

 

इतनी ऊंची कीमतों पर खरीदारी करते समय विशेषज्ञों ने दो बातों का विशेष ध्यान रखने को कहा है:

 

·         हॉलमार्किंग का रखें ध्यान: हमेशा BIS हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड सोना ही खरीदें। ज्वेलरी पर लगे अल्फान्यूमेरिक कोड (जैसे- AZ4524) से उसकी शुद्धता की जांच करें।

 

·         कीमतों का मिलान: खरीदने से पहले IBJA की वेबसाइट पर उस दिन के आधिकारिक रेट को 24, 22 और 18 कैरेट के हिसाब से क्रॉस-चेक जरूर करें।

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