नई दिल्ली। दुनिया जिस रफ्तार से विकास की अंधी दौड़ में भाग रही है, उसी रफ्तार से वह एक बड़े प्राकृतिक विनाश के करीब पहुँच रही है। यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी (UNU-INWEH) की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक जल संकट को लेकर जो आंकड़े पेश किए हैं, वे न केवल डराने वाले हैं बल्कि अस्तित्व पर खतरे की घंटी बजा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पृथ्वी पर जल संसाधन इतनी तेजी से सिमट रहे हैं कि अब जल संकट कोई अस्थायी समस्या नहीं, बल्कि एक 'स्थायी वैश्विक आपातकाल' बन चुका है।
4 अरब लोग, बूंद-बूंद को मोहताज
रिपोर्ट का सबसे भयावह पहलू यह है कि दुनिया की करीब 4 बिलियन आबादी साल में कम से कम एक महीना पानी की भारी किल्लत के बीच गुजारती है। यह संकट अब केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया के सबसे विकसित शहरों के दरवाजे पर भी दस्तक दे चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के 100 सबसे बड़े शहरों में से 50 शहर वर्तमान में गंभीर जल संकट की जद में हैं।
रेड जोन में भारत: दिल्ली दुनिया का चौथा सबसे प्यासा शहर
भारतीय महानगरों के लिए स्थिति 'खतरे के निशान' से ऊपर पहुँच चुकी है। ग्राउंड वॉटर का गिरता स्तर और खराब प्रबंधन भारत के बड़े शहरों को रेगिस्तान बनाने की ओर अग्रसर है।
· दिल्ली: जल संकट के मामले में वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर है।
· कोलकाता और मुंबई: ये शहर क्रमश: 9वें और 12वें स्थान पर हैं।
· बेंगलुरु और चेन्नई: आईटी हब कहे जाने वाले ये शहर 24वें और 29वें स्थान पर हैं।
चेन्नई के लिए 'डे जीरो' (वह दिन जब नलों में पानी आना बंद हो जाए) का खतरा फिर से मंडरा रहा है। पहले भी चेन्नई ऐसी स्थिति देख चुका है, और रिपोर्ट कहती है कि अगर जल संचयन की दिशा में क्रांतिकारी कदम नहीं उठाए गए, तो यह दोबारा इतिहास दोहराएगा।
काबुल: दुनिया का पहला 'पानी-विहीन' शहर बनने की कगार पर
रिपोर्ट में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल को लेकर सबसे चौंकाने वाली भविष्यवाणी की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि काबुल दुनिया का पहला ऐसा आधुनिक शहर बन सकता है, जहाँ पानी का स्रोत पूरी तरह खत्म हो जाएगा। वहीं, मेक्सिको सिटी की स्थिति और भी अजीब है; वहाँ ग्राउंड वॉटर के अत्यधिक दोहन के कारण जमीन हर साल 20 इंच धंस रही है, जिससे शहर के नीचे खाली जगह बन रही है और बड़ी इमारतों पर खतरा मंडरा रहा है।
एशिया के शहरों पर वॉटर स्ट्रेस (आंकड़ों की नजर में)
एशियाई शहरों में बेसलाइन वॉटर स्ट्रेस (पानी की मांग और उपलब्धता का अंतर) खतरनाक स्तर पर है:
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रैंक |
शहर |
वॉटर स्ट्रेस (%) |
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1 |
चेन्नई |
85-90% |
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2 |
बेंगलुरु |
80-85% |
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3 |
दिल्ली |
80-82% |
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4 |
इस्लामाबाद |
80% |
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5 |
काबुल |
78% |
1990 के बाद झीलों का विनाश
रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 1990 के बाद से दुनिया की 50 प्रतिशत बड़ी झीलों में पानी की मात्रा में भारी गिरावट आई है। बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ संसाधनों के अनियंत्रित दोहन ने प्रकृति के इस अनमोल उपहार को खत्म कर दिया है।
यह रिपोर्ट केवल आंकड़े नहीं, बल्कि मानवता के लिए आखिरी चेतावनी है। यदि जल प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और नदियों के पुनरुद्धार पर तत्काल काम नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए 'पानी' सोने से भी अधिक महंगी वस्तु बन जाएगी।