त्रिपुरा के एक युवक पर अभद्र और नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर आमिर शौकीन को गिरफ्तार कर लिया है। इस संबंध में राजधानी के सदर बाजार थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी आमिर इलाके का हिस्ट्रीशीटर (बैड कैरेक्टर) है और उस पर पहले भी झगड़े व मारपीट के कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की 'इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस' (IFSO) इकाई ने सोशल मीडिया पर प्रसारित विवादित वीडियो का संज्ञान लेकर जांच शुरू की। आरोपी को दबोचने के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई थीं। दिल्ली पुलिस अब उसे स्थानीय अदालत में पेश करेगी, जहां त्रिपुरा पुलिस उसकी ट्रांजिट रिमांड मांगकर आगे की पूछताछ के लिए उसे अपने साथ ले जाने की तैयारी में है। जांच में सामने आया है कि यह विवादित क्लिप लगभग एक माह पूर्व अहमदाबाद में रिकॉर्ड की गई थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में सात से आठ लोगों की संलिप्तता सामने आ रही है, जिनकी भूमिका की भी गहन पड़ताल की जा रही है।
जांच में जुटी स्पेशल यूनिट, छात्र संगठन ने की सख्त कार्रवाई की मांग
इससे पहले दिल्ली पुलिस की 'स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन' (SPUNER) ने IFSO को औपचारिक पत्र भेजकर इस वीडियो पर त्वरित कार्रवाई का अनुरोध किया था। सूचना के आधार पर पुलिस जब पहली बार शौकीन के आवास पर पहुंची, तो वह वहां से फरार मिला था।
इधर, 'त्रिपुरा स्टूडेंट्स फोरम दिल्ली' (TSFD) ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि वीडियो में त्रिपुरा के युवक को गंभीर मानसिक प्रताड़ना, अपमान और अशोभनीय व्यवहार का शिकार बनाया गया। छात्र संगठन ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्य—जैसे मूल फुटेज, मेटाडेटा, सोशल मीडिया प्रोफाइल विवरण और अपलोड हिस्ट्री—को कानूनी तौर पर सुरक्षित रखा जाए, ताकि आरोपी के खिलाफ ठोस कार्रवाई हो सके। इसके साथ ही पीड़ित को किसी भी तरह के दबाव या धमकी से बचाने के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाने की भी अपील की गई है।
पूर्वोत्तर के नागरिकों की सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों की स्थिति
इस घटना ने एक बार फिर पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के खिलाफ होने वाले नस्लीय भेदभाव और उसके कानूनी समाधान पर बहस छेड़ दी है। वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए एमपी बेजबरुआ समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में नस्लीय टिप्पणी, उत्पीड़न और भेदभाव को कड़ाई से रोकने के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) में नए संशोधन और विशेष कानूनी प्रावधान जोड़ने की सिफारिश की थी।
हालांकि, इस पर अलग से विशेष कानून बनाने के बजाय सरकार का रुख मौजूदा व्यवस्था को लागू रखने का रहा है। गृह मंत्रालय ने 24 मार्च को लोकसभा में स्पष्ट किया था कि पूर्वोत्तर के नागरिकों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या नस्लीय दुर्व्यवहार से निपटने के लिए देश के मौजूदा कानूनों में पहले से ही पर्याप्त दंडात्मक प्रावधान मौजूद हैं। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी थी कि केंद्र स्तर पर ऐसे मामलों का कोई पृथक राष्ट्रीय आंकड़ा संकलित नहीं किया जाता है।