लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इन दिनों केवल मौसम का पारा ही नहीं चढ़ रहा, बल्कि बिजली की मांग ने भी सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस उछाल के पीछे सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि सात समंदर पार छिड़ा ईरान-इजरायल और अमेरिका का तनाव है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी (LPG) की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे घरेलू रसोई का बजट और व्यवस्था दोनों चरमरा गई हैं।
15 दिनों में 2000 मेगावाट का उछाल
प्रदेश में मार्च की शुरुआत में बिजली की अधिकतम मांग 19,190 मेगावाट थी, जो महज 10 दिनों के भीतर बढ़कर 21,675 मेगावाट तक पहुंच गई। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, गैस सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ताओं ने रसोई गैस का विकल्प बिजली में ढूंढ लिया है। लोग अब खाना पकाने के लिए गैस चूल्हे के बजाय इंडक्शन चूल्हों, माइक्रोवेव और इलेक्ट्रिक केतली का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
बाजार में इंडक्शन और रॉड की 'शॉर्टेज'
राजधानी लखनऊ के प्रमुख बाजारों (नाका और गोमती नगर) में बिजली के उपकरणों की बिक्री में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है।
· बिक्री में वृद्धि: कारोबारियों के मुताबिक, जो दुकानदार पहले दिनभर में 10-15 इंडक्शन बेचते थे, अब उनकी बिक्री 50 के पार पहुंच गई है।
· उपकरणों की मांग: इंडक्शन के साथ-साथ इमरसन रॉड और इलेक्ट्रिक कुकवेयर की मांग भी बढ़ी है, जिसके चलते थोक विक्रेताओं को अब कई नई कंपनियों से स्टॉक मंगवाना पड़ रहा है।
बिजली खपत के ताजा आंकड़े (मेगावाट में)
युद्ध और घरेलू जरूरतों के बीच मार्च के महीने में बिजली की खपत का ग्राफ कुछ इस तरह रहा:
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तारीख |
बिजली की मांग (मेगावाट) |
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5 मार्च |
19,229 |
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8 मार्च |
21,277 |
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10 मार्च |
21,678 (उच्चतम) |
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13 मार्च |
21,048 |
विभाग के ओर से पीक ऑवर्स में हो रही निगरानी
यूपी पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने स्पष्ट किया है कि मांग बढ़ने के बावजूद प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है। विभाग 32,000 मेगावाट तक की आपूर्ति क्षमता के साथ तैयार है। हालांकि, सुबह और शाम के 'पीक ऑवर्स' (8 से 10 बजे) के दौरान शहरी फीडरों की विशेष निगरानी की जा रही है ताकि ओवरलोडिंग की समस्या न हो।