कोटा। दिल्ली-मुंबई रेल रूट पर रविवार तड़के उस समय हड़कंप मच गया, जब त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस के दो कोचों में अचानक आग लग गई। घटना कोटा मंडल के लूणी रीछा और विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के बीच हुई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा एसी कोच धुएं और लपटों से घिर गया। हालांकि रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता और समय रहते यात्रियों को बाहर निकाल लेने के कारण बड़ा हादसा टल गया और किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
जानकारी के मुताबिक, हादसा रविवार सुबह करीब 5:15 बजे हुआ। आग राजधानी एक्सप्रेस के बी-1 कोच और उसके पीछे लगे सेकेंड लगेज कम गार्ड वैन में लगी थी। ट्रेन में मौजूद यात्रियों ने पहले धुआं उठते देखा, जिसके बाद कोच में अफरा-तफरी मच गई। गार्ड ने तुरंत इसकी सूचना लोको पायलट को दी। सूचना मिलते ही ट्रेन को तत्काल रोका गया और इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू किया गया।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बी-1 कोच में कुल 68 यात्री सफर कर रहे थे। आग लगने के बाद रेलवे स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों ने तेजी दिखाते हुए यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया। करीब 15 मिनट के भीतर पूरे कोच को खाली करा लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे डिब्बे को अपनी चपेट में ले लिया था। आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि कोच का बड़ा हिस्सा जलकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही कोटा जंक्शन और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर अलर्ट जारी कर दिया गया। कोटा स्टेशन पर हूटर बजने लगे और राहत-बचाव टीमों को मौके के लिए रवाना किया गया। रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी भी तुरंत घटनास्थल की ओर रवाना हुए। स्थानीय प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीमों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया गया।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि आग को ट्रेन के अन्य हिस्सों तक फैलने से रोकने के लिए प्रभावित कोच को करीब 20 मिनट बाद ट्रेन से अलग कर दिया गया। एहतियातन ट्रेन की बिजली सप्लाई भी काट दी गई और दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर ट्रैफिक अस्थायी रूप से रोक दिया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सका। इसके बाद यात्रियों को दूसरे डिब्बों में शिफ्ट किया गया और ट्रेन को लगभग साढ़े चार घंटे की देरी से कोटा के लिए रवाना किया गया।
बताया जा रहा है कि हादसे में कई यात्रियों का सामान जलकर राख हो गया। लगेज वैन में रखे सूटकेस, बैग और अन्य कीमती सामान आग की भेंट चढ़ गए। रेलवे प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और आग लगने के कारणों की जांच कराई जा रही है। शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
यह ट्रेन रविवार सुबह करीब 3:45 बजे मध्य प्रदेश के रतलाम जंक्शन से रवाना हुई थी और इसका अगला निर्धारित स्टॉप कोटा जंक्शन था। राजस्थान की सीमा में प्रवेश करने से पहले विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के पास हादसा हो गया। राहत कार्य के दौरान कई यात्री घबराए हुए दिखाई दिए, जबकि कुछ लोगों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
दोपहर करीब 1:15 बजे जब राजधानी एक्सप्रेस कोटा स्टेशन पहुंची तो वहां यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। बी-1 कोच में सफर कर रहे कई यात्रियों ने रेलवे की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई और सामान के नुकसान की भरपाई की मांग की। रेलवे प्रशासन ने प्रभावित यात्रियों को पांच-पांच हजार रुपए की तत्काल आर्थिक सहायता देने की पेशकश की, लेकिन कुछ यात्रियों ने इसे लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उनका लाखों रुपए का सामान जल गया है और मामूली सहायता पर्याप्त नहीं है।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ यात्रियों ने मामले में FIR दर्ज कराने की मांग शुरू कर दी। यात्री ट्रेन में दोबारा बैठने को तैयार नहीं थे और रेलवे अधिकारियों से जवाब मांग रहे थे। मामले को शांत कराने के लिए वरिष्ठ अधिकारी लगातार समझाइश देते रहे। आखिरकार कोटा मंडल के डीआरएम Anil Kalra स्वयं यात्रियों के साथ जीआरपी थाने पहुंचे, जहां FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कराई गई।
रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस घटना के कारण दिल्ली-मुंबई रूट की 8 से 10 ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ। हालांकि सुबह करीब 9:30 बजे ट्रैक पर दोबारा यातायात बहाल कर दिया गया था। यात्रियों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं, ताकि प्रभावित ट्रेनों की जानकारी समय पर मिल सके।