मध्य पूर्व में हालिया संघर्ष के बाद खाड़ी देशों की राजनीति और रणनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच करीब 40 दिनों तक चले तनावपूर्ण संघर्ष के बाद अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारियों को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में अबू धाबी भारत के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, United Arab Emirates अब भारत के साथ एक व्यापक द्विपक्षीय रक्षा ढांचे की संभावना तलाश रहा है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। माना जा रहा है कि UAE अब नई दिल्ली के साथ भी उसी तरह के रणनीतिक और रक्षा संबंधों को मजबूत बनाना चाहता है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi की 15 मई को प्रस्तावित UAE यात्रा से पहले इस मुद्दे ने और अधिक महत्व हासिल कर लिया है। अबू धाबी में राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के साथ उनकी बैठक में रक्षा सहयोग, सुरक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय प्रमुख एजेंडे में शामिल रह सकते हैं।
हालिया ईरान संघर्ष ने UAE की चिंताओं को बढ़ा दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव के दौरान UAE को खाड़ी के अन्य देशों की तुलना में अधिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बताया गया है कि संघर्ष के दौरान ईरान की ओर से सैकड़ों बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ हजारों ड्रोन हमले किए गए, जिससे अमीरात के भीतर सुरक्षा ढांचे को लेकर चिंता बढ़ गई।
इसी वजह से अबू धाबी अपने पारंपरिक सहयोगियों की भूमिका को भी नए नजरिए से देख रहा है। युद्ध के दौरान पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के बीच इस्लामाबाद में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक ने UAE को असहज कर दिया। खास बात यह रही कि संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने के बावजूद UAE को इस बैठक में शामिल नहीं किया गया। इसे लेकर अबू धाबी के भीतर नाराजगी बढ़ी है।
हाल के महीनों में Saudi Arabia और UAE के संबंधों में भी मतभेद उभरते दिखाई दिए हैं। यमन संकट, आर्थिक फैसलों और क्षेत्रीय रणनीतियों को लेकर दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ने की चर्चाएं तेज हुई हैं। पाकिस्तान को आर्थिक सहायता और कर्ज से जुड़े मुद्दों पर भी UAE का रुख पहले से ज्यादा सख्त माना जा रहा है।
इसी बीच UAE द्वारा OPEC से अलग होने के फैसले को भी खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के भीतर बढ़ती दरारों का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते भू-राजनीतिक हालात में UAE अब ऐसे साझेदारों की तलाश में है, जो लंबे समय तक स्थिर और भरोसेमंद सहयोग दे सकें।
भारत और UAE के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और सुरक्षा संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval ने हाल ही में अबू धाबी का दौरा किया था। इस दौरान दोनों देशों के बीच नई सुरक्षा व्यवस्थाओं, खुफिया सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर चर्चा हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत और UAE के बीच रक्षा समझौता औपचारिक रूप लेता है, तो यह न केवल दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि मध्य पूर्व और हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।