लखनऊ। प्रदेश में आगामी बकरीद के त्योहार से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक स्थलों के उपयोग को लेकर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सोमवार को लखनऊ में आयोजित 'अमर उजाला संवाद 2026' कार्यक्रम के मंच से मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में किसी भी सूरत में सड़कों पर नमाज पढ़ने या ट्रैफिक बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने सख्त लहजे में हिदायत दी कि नियमों का पालन शांतिपूर्वक और आपसी समझ से किया जाए, अन्यथा प्रशासन व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आस्था का सम्मान है, लेकिन वह जनजीवन की कीमत पर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, "अगर किसी मस्जिद या ईदगाह में जगह कम है और नमाजियों की तादाद ज्यादा है, तो लोग शिफ्ट (पालियों) में नमाज अदा कर सकते हैं। हमें इबादत से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सड़क पर अराजकता और अव्यवस्था फैलाने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती। सार्वजनिक मार्ग आम नागरिकों, एम्बुलेंस और यात्रियों के आवागमन के लिए हैं, न कि भीड़ जुटाने या मार्ग अवरुद्ध करने के लिए।"
संवाद के दौरान यूपी की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने कड़े प्रशासनिक फैसलों का बचाव किया। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और नागरिक जिम्मेदारी को जोड़ते हुए कहा कि यदि किसी के पास पर्याप्त स्थान या सामर्थ्य नहीं है, तो उसे नियमों के दायरे में रहकर ही सामंजस्य बिठाना होगा। व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए हर संप्रदाय और नागरिक को संविधान और देश के कानून का सम्मान करना ही पड़ेगा।
बरेली की घटना का जिक्र कर दी सख्त चेतावनी
मुख्यमंत्री ने पिछले साल सितंबर 2025 में बरेली में 'आई लव मोहम्मद' विवाद के बाद हुए बवाल का संदर्भ देते हुए उपद्रवियों को सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा, "बरेली में कुछ तत्वों ने कानून को चुनौती देने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें सरकार की प्रशासनिक ताकत का अंदाजा मिल गया होगा। उत्तर प्रदेश में कानून का शासन सभी के लिए समान है। किसी भी विशेष वर्ग को सड़कों को बंधक बनाने या शहर का माहौल बिगाड़ने का विशेषाधिकार नहीं है।"
कट्टा-बम के दौर से निकलकर अब ब्रह्मोस बना रहा है यूपी
उत्तर प्रदेश के बदलते आर्थिक परिदृश्य और औद्योगिक विकास का खाका खींचते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब सूबे की वैश्विक पहचान बदल चुकी है। उन्होंने कहा, "एक दौर था जब उत्तर प्रदेश की छवि कट्टा (अवैध हथियारों) और बम बनाने वाले राज्य के रूप में थी, लेकिन आज हमारी डिफेंस कॉरिडोर में ब्रह्मोस मिसाइलें तैयार हो रही हैं।" उन्होंने आगे कहा कि नकारात्मक माहौल 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया' को जन्म देता है, जबकि उनकी सरकार ने सकारात्मक माहौल बनाकर 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' (ODVP) को वैश्विक मंच पर स्थापित किया है। इसी का परिणाम है कि राज्य में भारी निवेश आ रहा है, रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, और यूपी तेजी से 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
महिला सुरक्षा और आर्थिक सुदृढ़ता पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले छह वर्षों में उत्तर प्रदेश 'बीमारू राज्य' की श्रेणी से बाहर निकलकर एक 'रेवेन्यू सरप्लस' (राजस्व अधिशेष) राज्य बन चुका है, जिससे अब प्रदेश को वित्तीय मदद के लिए किसी के आगे हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। महिला सुरक्षा के मोर्चे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जो बहन-बेटियां पहले दिन में भी बाहर निकलने से कतराती थीं, वे अब निडर होकर नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं। छेड़खानी और अराजकता पर पूरी तरह लगाम कसी जा चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, जहां उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर तुष्टीकरण का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश के मॉडल 'नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा' का उदाहरण देश के सामने रखा था।