मौसम के कड़े मिजाज पर जीती सुहाग की डोर; काशी से गोरखपुर तक शंखध्वनि के साथ खुला अखंड व्रत, काशी समेत पूर्वांचल में 'अर्नब' चक्रवात के बीच छलनी से निहारा चांद

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वाराणसी। पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना का महापर्व करवाचौथ (करक चतुर्थी) देशभर में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। दिल्ली से लेकर सुदूर पूर्व तक सुहागिनों ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से शिव-पार्वती और करवा माता की आराधना की। धर्म और संस्कृति की राजधानी काशी समेत समूचा पूर्वांचल दिनभर उत्सव के रंग में डूबा रहा, हालांकि चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के असर ने व्रतियों की परीक्षा भी खूब ली।

 

 

गुरुवार, 29 अक्टूबर को चतुर्थी तिथि के संयोग में व्रती महिलाओं ने शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक पूजा के मुख्य मुहूर्त में करवा फेरने की रस्म निभाई। काशी के गोदौलिया, चौक, लक्सा, विशेश्वरगंज और अर्दली बाजार में सुबह से ही सुहाग सामग्री, मिट्टी के करवे, सींक, फल और बनारसी साड़ियों की खरीदारी को लेकर चहल-पहल रही। हाथों में रची मेहंदी और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने सामूहिक रूप से करवा चौथ की व्रत कथा सुनी।

 

 

शाम ढलते ही गंगा के पक्के घाटों—दशाश्वमेध, अस्सी और पंचगंगा—से लेकर वरुणापार की सोसायटियों की छतों पर पूजा की थालियां सज गईं। हालांकि, 'अर्नब' चक्रवात के प्रभाव से आसमान में छाई घनी बादलों की चादर और तेज हवाओं ने चंद्रदर्शन का इंतजार काफी लंबा कर दिया। पूर्वांचल के कई इलाकों में बूंदाबांदी और बादलों के डेरे के चलते व्रती महिलाएं बेचैन नजर आईं और फोन व मौसम ऐप के जरिए एक-दूसरे से चांद दिखने की जानकारी लेती रहीं।

 

 

काशी में बादलों की भारी लुकाछिपी के बीच जैसे ही चंद्रदेव की हल्की झलक मिली, छतों पर शंखध्वनि और घंटियों की गूंज सुनाई देने लगी। व्रतियों ने तेज हवा के बीच जैसे-तैसे मिट्टी के दीये संजोकर छलनी की ओट से पहले चांद और फिर अपने जीवनसाथी का दीदार किया। पतियों ने जल पिलाकर सुहागिनों का निर्जला उपवास खुलवाया।

 

 

वाराणसी के साथ-साथ पूर्वांचल के अन्य जिलों—प्रयागराज, गोरखपुर, मऊ, गाजीपुर, जौनपुर और मिर्जापुर में भी त्योहार की चमक दिखी। प्रयागराज में संगम तीरे और गोरखपुर के मोहद्दीपुर व गोलघर इलाकों में 'अर्नब' के बादलों के चलते महिलाओं को काफी देर तक छतों पर टकटकी लगाए रखना पड़ा। कई जगह महिलाओं ने डिजिटल माध्यमों और अन्य शहरों में दिख रहे चांद के समय के अनुसार अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया।

 

 

व्यापारिक दृष्टि से भी इस बार पूर्वांचल में त्योहार ने बड़ा उछाल दर्ज किया। दिन में मौसम की तल्खी और चक्रवात की आशंका के बावजूद सराफा बाजार, मिठाई प्रतिष्ठानों और कपड़ा मंडियों में देर रात तक रौनक रही। मौसम के बिगड़े मिजाज और बादलों की रुकावट के बीच आस्था, प्रेम और समर्पण के इस संगम ने साबित किया कि विश्वास की डोर हर मुश्किल से कहीं अधिक मजबूत है।

 

 

'अर्नब' चक्रवात ने बढ़ाई धड़कनें: घने बादलों में अटका चांद, फोन और वीडियो कॉल से मिला सहारा

 

 

करवाचौथ पर इस बार सुहागिनों के सब्र का इम्तिहान मौसम ने भी जमकर लिया। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के असर से गुरुवार शाम समूचे पूर्वांचल के आसमान में घने बादलों का पहरा रहा। नम सर्द हवाओं और धुंधलके के चलते निर्धारित समय के बाद भी चंद्रदेव के दर्शन नहीं हो सके।

 

 

काशी, प्रयागराज, जौनपुर और गाजीपुर में महिलाएं पूजा की थाल संजोए घंटों छतों पर टकटकी लगाए रहीं। कई इलाकों में तेज हवा के झोंकों से थालियों में रखे दीप बुझते रहे, जिन्हें व्रती आंचल की ओट में संभालती दिखीं। बेचैनी बढ़ने पर महिलाओं ने मौसम ऐप्स और दूसरे जिलों के रिश्तेदारों को फोन कर चांद की स्थिति का जायजा लिया। कुछ जगहों पर जहां बादलों ने चांद को पूरी तरह घेरे रखा, वहां व्रतियों ने दूसरे शहरों से वीडियो कॉल पर चांद देखकर या शुभ मुहूर्त के पंचांगीय समय पर आकाश की दिशा में अर्घ्य देकर अपना निर्जला उपवास पूरा किया।

 

 

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