काशी में गूंजी शहनाई: छह जोड़ों ने लिए एक साथ फेरे, सात जन्मों तक साथ निभाने का लिया संकल्प, स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान ने रचाया सामूहिक विवाह

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वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी की पावन धरा रविवार को एक अनूठे सामाजिक समागम की साक्षी बनी। नाटी इमली स्थित गणेश मंडपम् लॉन में 'स्वर्णकार भारती सेवा संस्थान' द्वारा आयोजित भव्य सामूहिक विवाह सम्मेलन में 6 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। हालांकि, पहले 7 जोड़ों का विवाह प्रस्तावित था, लेकिन चंदौली की एक कन्या के शनिवार रात सड़क दुर्घटना में घायल होने के कारण एक विवाह स्थगित करना पड़ा। घायल कन्या का उपचार बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है।

 

विवाह का उत्सव रविवार दोपहर मैदागिन स्थित उन्नति रेजिडेंसी से शुरू हुआ, जहाँ से सभी 6 दूल्हों की "सामूहिक बारात" गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई। यह बारात मध्यमेश्वर, दारानगर, डी.ए.वी. कॉलेज और ईश्वरगंगी होते हुए नाटी इमली पहुँची। रास्ते भर समाज के विभिन्न वर्गों ने बारातियों का जोरदार स्वागत किया। कहीं पुष्प वर्षा हुई, तो कहीं शरबत और शीतल पेय से बारातियों की थकान मिटाई गई। स्वर्णकार क्षत्रिय कमेटी के पदाधिकारियों ने अध्यक्ष घनश्याम सेठ 'बच्चा' के नेतृत्व में बारात की कमान संभाली।

 

गणेश मंडपम् पहुँचने पर वधू पक्ष की महिलाओं ने पारंपरिक 'परछन' की रस्म अदा की, जिसके बाद सुसज्जित मंच पर जयमाल का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसके पश्चात, प्रकांड विद्वान चंद्रकांत पांडेय (मुखिया, श्रीनाथजी मंदिर) के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी जोड़ों के फेरे और पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुए। इस पुनीत कार्य के साक्षी बनने के लिए उत्तर प्रदेश सहित छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे कई राज्यों से समाज के प्रबुद्ध जन और पदाधिकारी वाराणसी पहुँचे।

 

 

गृहस्थी के उपहारों से सजा नया सफर

 

संस्थान और समाज की ओर से नवविवाहित जोड़ों को उनके नए जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक घरेलू सामान भेंट किया गया। उपहारों में अलमारी, पलंग, सिलाई मशीन, मिक्सर, कुकर, 111 बर्तनों का सेट, सोने की नथिया और चांदी के जेवर शामिल थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में राष्ट्रीय संस्थापक ई० योगेंद्र कुमार, सम्मेलन अध्यक्ष रवि सर्राफ, और जिलाध्यक्ष किशोर सेठ सहित संस्थान के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

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