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वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे मुस्लिम ! ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कर दिया बड़ा ऐलान

वक्फ संशोधन बिल 2024 को लेकर देशभर में विरोध की लहर तेज हो गई है। मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) समेत अन्य संगठनों ने इसे अस्वीकार्य बताते हुए कानूनी लड़ाई का ऐलान किया है।


लोकसभा और राज्यसभा में पारित होने के बाद वक्फ संशोधन बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस बीच, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बिल को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। बोर्ड के केंद्रीय कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि यह बिल मुसलमानों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। मुस्लिम संगठनों ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कानून राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया है और इससे समुदाय की धार्मिक संपत्तियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

 


ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव डॉ. मोहम्मद वकारुद्दीन लतीफी ने कहा कि सरकार ने इस बिल को पारित कर मुसलमानों के खिलाफ नकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर देश में नफरत का माहौल बना रही है और इस कानून के जरिए मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला किया जा रहा है।


शाहजहांपुर में जुमे की नमाज के दौरान हुआ विरोध


शाहजहांपुर में शुक्रवार को जुमे की नमाज से पहले टाउन हॉल मस्जिद में इस बिल के खिलाफ तकरीर की गई। नमाज के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस कानून को काले कानून की संज्ञा दी और इसे वापस लेने की मांग की। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। मस्जिद से बाहर निकलते हुए ईदगाह कमेटी के सचिव सैय्यद कासिम रजा ने कहा कि यह बिल मुसलमानों के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने कहा कि जब इस बिल पर चर्चा के दौरान जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) का गठन हुआ था, तब 15 सदस्यों ने इसका विरोध किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए संशोधन के तहत जिलाधिकारियों को असीमित अधिकार दे दिए गए हैं, जिससे मुसलमानों की धार्मिक संपत्तियों पर नियंत्रण किया जा सकता है।


अलीगढ़ में विरोध, 1947 जैसे हालात बनने की चेतावनी


अलीगढ़ में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद अकबर कासमी ने भी इस बिल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों को छीनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस बिल को वापस नहीं लिया, तो मुसलमान सड़कों पर उतरकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से 1947 में आजादी के लिए मुसलमानों ने आंदोलन किया था, वैसा ही माहौल फिर से बन सकता है।

 


सरकार की दलील- पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लिया गया फैसला


वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह कानून देशभर में वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और उन्हें व्यवस्थित करने के लिए लाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि बिल को जेपीसी के पास भेजने के बाद विभिन्न सुधार किए गए और इसे पारित किया गया।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस कानून को बड़ा सुधार करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस कानून से पारदर्शिता बढ़ेगी और गरीब तथा पिछड़े मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की रक्षा होगी। उनका कहना था कि वक्फ संपत्तियों में वर्षों से गड़बड़ी चल रही थी, जिससे खासतौर पर मुस्लिम महिलाओं और गरीब तबके को नुकसान हो रहा था। यह नया कानून इस समस्या का समाधान करेगा।


बिल को लेकर JDU में बगावत, 7 नेताओं ने दिया इस्तीफा


वहीं, इस बिल को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। बिहार में जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बिल का समर्थन किया, जिससे पार्टी के कई मुस्लिम नेता नाराज हो गए। विरोध स्वरूप JDU के सात नेताओं ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी है। इनमें अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मलिक, महासचिव मोहम्मद तबरेज सिद्दीकी, भोजपुर से पार्टी सदस्य मोहम्मद दिलशान राईन और मोतिहारी के पूर्व प्रत्याशी मोहम्मद कासिम अंसारी शामिल हैं। इन नेताओं ने कहा कि JDU ने मुस्लिम समुदाय के साथ विश्वासघात किया है।


कांग्रेस और DMK भी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट


विपक्षी दलों ने इस कानून को संविधान के खिलाफ बताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट में इस बिल को रद्द करने की याचिका दायर कर दी है। DMK ने भी इस कानून के खिलाफ कोर्ट जाने की घोषणा की थी।

 


लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित


बिल पास होने के बाद शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि इस सत्र में वक्फ संशोधन बिल समेत 16 विधेयक पारित किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि इस सत्र की उत्पादकता 118% रही।

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