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म्यांमार में 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप, 700 पहुंचा मौतों का आंकड़ा, भारत ने भेजी मदद, थाईलैंड में आपातकाल घोषित

म्यांमार में शुक्रवार को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने देश में भारी तबाही मचाई है। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) का अनुमान है कि इस आपदा में 10,000 से अधिक लोगों की जान जा सकती है। भूकंप का केंद्र म्यांमार था, लेकिन इसके झटके थाईलैंड, भारत, बांग्लादेश और चीन तक महसूस किए गए।


म्यांमार की सैन्य सरकार के अनुसार, अब तक 694 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1,670 से अधिक लोग घायल हुए हैं। थाईलैंड में भी 10 लोगों की जान गई है। कुल मिलाकर, अब तक 700 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। बढ़ते नुकसान को देखते हुए म्यांमार के छह राज्यों और पूरे थाईलैंड में आपातकाल घोषित कर दिया गया है।


म्यांमार और थाईलैंड में यह भूकंप बीते दो शताब्दियों का सबसे शक्तिशाली झटका माना जा रहा है। शुक्रवार सुबह 11:50 बजे आए इस भूकंप ने कई शहरों में इमारतों को धराशायी कर दिया, सड़कों को फाड़ दिया और हजारों लोगों को बेघर कर दिया।

 


भारत ने भेजी राहत सामग्री


भूकंप के बाद भारत ने म्यांमार की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत 15 टन राहत सामग्री की पहली खेप म्यांमार भेजी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी पुष्टि की।


भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारतीय वायु सेना का सी-130 विमान कंबल, तिरपाल, स्लीपिंग बैग, सोलर लैंप, फूड पैकेट और स्वच्छता किट लेकर रवाना हुआ। इसके साथ ही एक मेडिकल टीम और सर्च एवं रेस्क्यू यूनिट भी भेजी गई है। जयशंकर ने कहा कि भारत आगे भी सहायता भेजता रहेगा।


आंग सान सूची सुरक्षित, जेल में ही हैं


म्यांमार की पूर्व नेता आंग सान सूची सुरक्षित हैं। बीबीसी के सूत्रों ने बताया कि वह जेल में हैं और उन्हें किसी तरह की क्षति नहीं पहुंची है। उल्लेखनीय है कि 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद सूची को हिरासत में ले लिया गया था और 2023 में भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें जेल भेज दिया गया था।


थाईलैंड में भी भूकंप से तबाही


थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक निर्माणाधीन इमारत भूकंप के दौरान गिर गई। अब तक वहां से 10 शव निकाले गए हैं। बैंकॉक के डिप्टी गवर्नर ने बताया कि तीन निर्माणाधीन इमारतों से 101 लोग लापता हैं। बचाव कार्य जारी है।

 


बिजली गुल, राहत कार्यों में बाधा


रेड क्रॉस ने बताया कि मांडले, सागाइंग और दक्षिणी शान राज्य में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण राहत और बचाव कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं। रेड क्रॉस ने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार नुकसान अत्यधिक हुआ है और स्थिति गंभीर बनी हुई है।


म्यांमार और थाईलैंड में राहत के लिए रेड क्रॉस ने डेढ़ लाख डॉलर की सहायता देने का ऐलान किया है। इस राशि का इस्तेमाल भोजन, पानी, कंबल, तिरपाल और स्वच्छता किट जैसी जरूरी चीजों के लिए किया जाएगा।


14 आफ्टरशॉक्स, सबसे बड़ा 6.7 तीव्रता का


USGS के मुताबिक, मुख्य भूकंप के बाद म्यांमार में अब तक 14 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं। इनमें से अधिकतर 5.0 तीव्रता से कम थे, लेकिन सबसे शक्तिशाली झटका 6.7 तीव्रता का था, जो बड़े भूकंप के 10 मिनट बाद आया।


अमेरिका, चीन और रूस ने की मदद की पेशकश


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका जल्द ही म्यांमार को आपातकालीन सहायता भेजेगा। उन्होंने कहा कि यह एक भयानक त्रासदी है और अमेरिका पहले ही म्यांमार के अधिकारियों से बातचीत कर चुका है।


चीन ने भी म्यांमार में राहत कार्यों के लिए 37 विशेषज्ञों की टीम भेजी है। यह टीम भूकंप चेतावनी प्रणाली, ड्रोन और अन्य बचाव उपकरणों से लैस है। वहीं, रूस ने 120 बचावकर्मियों और दो आपूर्ति विमानों को म्यांमार भेजा है।


म्यांमार के छह राज्यों में इमरजेंसी


भूकंप के बाद म्यांमार की सैन्य सरकार ने सगाइंग, मांडले, बागो, मागवे, शान राज्य (पूर्वी हिस्सा) और नेपीदा में आपातकाल घोषित कर दिया है। सरकार के अनुसार, इन इलाकों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है।


सैन्य सरकार के प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने बताया कि नेपीदा में 96, सागाइंग में 18 और मांडले के क्याक्से टाउनशिप में 30 लोगों की मौत हुई है। सरकार का कहना है कि राहत और बचाव कार्य पूरी तेजी से जारी हैं।

 


अभी और बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा


हालांकि आधिकारिक रूप से 700 से अधिक मौतों की पुष्टि की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा 10,000 तक जा सकता है। कई इलाकों में संचार सेवाएं ठप हैं और राहत दलों को वहां पहुंचने में दिक्कत हो रही है।


भूकंप के चलते हजारों लोग बेघर हो गए हैं और अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। म्यांमार में यह आपदा पिछले 200 वर्षों में आई सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

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