संभल जिले के गुन्नौर तहसील के दबथरा श्याम गांव में 10 मार्च को भाजपा नेता गुलफाम सिंह यादव की हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उन्हें जहरीला इंजेक्शन देकर मौत के घाट उतार दिया। इस हत्याकांड की साजिश सपा नेता और जुनावई के ब्लॉक प्रमुख रवि यादव और उनके पिता महेश यादव ने रची थी। इसके लिए उन्होंने 5 लाख रुपये की सुपारी दी थी। पुलिस ने मंगलवार को मामले का खुलासा किया और अब तक 8 में से 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अभी भी फरार हैं।
राजनीतिक रंजिश के चलते रची गई हत्या की साजिश
संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के अनुसार, इस हत्या के पीछे राजनीतिक दुश्मनी थी। महेश यादव और गुलफाम सिंह यादव के बीच चुनावी प्रतिद्वंद्विता थी। ब्लॉक प्रमुख के अविश्वास प्रस्ताव से बचने और हाल ही में हुए एमएलसी चुनाव की रंजिश को लेकर महेश यादव ने गुलफाम को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
हत्या की योजना के लिए महेश यादव ने बरेली केंद्रीय कारागार में बंद कुख्यात अपराधी धर्मवीर उर्फ धम्मा से मुलाकात की। उसने धर्मवीर की जमानत और कानूनी अपील का खर्चा उठाने का वादा किया। महेश ने कुल 35 हजार रुपये देकर धर्मवीर की जमानत करवाई और उसके ट्रैक्टर को छुड़ाने के लिए 1 लाख रुपये भी दिए। इस अहसान के बदले धर्मवीर को गुलफाम की हत्या करने का काम सौंपा गया।
इंजेक्शन से हत्या का बना प्लान
महेश यादव, धर्मवीर और उसके साथियों ने इस हत्या को सामान्य मौत दिखाने के लिए जहरीले इंजेक्शन से हत्या करने की योजना बनाई। इस योजना में नेमपाल, महेश यादव और धर्मवीर शामिल थे। नेमपाल को जहरीला इंजेक्शन लाने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसके लिए उसे विकास यादव ने मदद की। विकास ने ही नेमपाल को रामनिवास उर्फ नारद से मिलवाया, जो इस तरह की जहरीली दवाएं रखता था।
घटना के दिन का घटनाक्रम
10 मार्च को दोपहर में बाइक सवार तीन युवक गुलफाम सिंह यादव के घर पहुंचे। उन्होंने खुद को मेहमान बताकर उनसे बातचीत शुरू की। इसी दौरान एक युवक ने अचानक गुलफाम के पेट में जहरीला इंजेक्शन लगा दिया। हमला होते ही गुलफाम सिंह दर्द से तड़पने लगे और जमीन पर गिर पड़े। हमलावर तुरंत सफेद रंग की अपाचे बाइक से फरार हो गए।
गुलफाम की चीख-पुकार सुनकर घर और गांव के लोग मौके पर पहुंचे। उन्हें अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
8 में से 6 आरोपी गिरफ्तार, 2 फरार
पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल 8 में से 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में ब्लॉक प्रमुख रवि यादव, उसके पिता महेश यादव, मुकेश यादव, विकास यादव, रामनिवास उर्फ नारद और कासगंज जिले के सोरों के नगर पंचायत अध्यक्ष पति सुधीर कुमार उर्फ पप्पू यादव शामिल हैं।
सुधीर कुमार ने रवि यादव और महेश यादव को 14 दिनों तक शरण दी थी। पुलिस ने उसे जुनावई के पास से गिरफ्तार किया। इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी धर्मवीर और नेमपाल अभी भी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
गुलफाम सिंह यादव का राजनीतिक सफर
गुलफाम सिंह यादव एक प्रमुख भाजपा नेता थे। वह अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रह चुके थे और 2022 के विधानसभा चुनाव में संभल विधानसभा सीट के प्रभारी थे। इसके अलावा, वह लोकसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी के प्रभारी रह चुके थे। उन्हें दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री का पद भी मिल चुका था।
गुलफाम की पत्नी जावित्री यादव तीन बार से गांव की प्रधान हैं। उनके दो बेटे और छह बेटियां हैं। सभी बेटियों की शादी हो चुकी है। उनके बड़े बेटे दिव्य प्रकाश यादव राजनीति में सक्रिय हैं और जुनावई ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं, जबकि छोटे बेटे विकास यादव खेती करते हैं।
गुलफाम की चुनावी हार और राजनीतिक संघर्ष
गुलफाम सिंह यादव की राजनीतिक यात्रा संघर्षों से भरी रही। संभल जिले में चार विधानसभा सीटें हैं—गुन्नौर, असमोली, संभल और चंदौसी (अनुसूचित जाति)। इनमें से गुन्नौर विधानसभा सीट यादव बहुल है।
2004 के उपचुनाव में सपा के कद्दावर नेता शफीकुर्रहमान बर्क ने मुलायम सिंह यादव को इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए राजी किया। इस चुनाव में भाजपा के गुलफाम सिंह यादव, सपा के मुलायम सिंह यादव और बसपा के आरिफ अली आमने-सामने थे।
मुलायम सिंह यादव को इस चुनाव में कुल 91.77% वोट (1,95,213 वोट) मिले, जबकि गुलफाम सिंह यादव को केवल 6,941 वोट मिले। बसपा के आरिफ अली 11,314 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
इसके बाद 2007 में भी गुलफाम ने गुन्नौर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी उन्हें सफलता नहीं मिली। उन्हें सिर्फ 3,200 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर रहे।
हत्या के पीछे गहरी साजिश
गुलफाम सिंह यादव की हत्या केवल राजनीतिक दुश्मनी तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक गहरी साजिश भी थी। ब्लॉक प्रमुख के अविश्वास प्रस्ताव से बचने के लिए महेश यादव ने यह कदम उठाया। इसके अलावा, एमएलसी चुनाव के दौरान हुए विवाद ने इस हत्या को और भी भयावह बना दिया।