अन्न-जल त्याग कर मांगा सम्मान: संत नरहरि दास की भव्य प्रतिमा और स्मृति द्वार की मांग को लेकर गूंजा अम्बेडकर पार्क, काशी के युवा ने उठाई स्वाभिमान की आवाज

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वाराणसी वाराणसी में स्वर्णकार समाज के अधिकारों और उनके आराध्य देव संत नरहरि दास के सम्मान की मांग को लेकर मंगलवार को अम्बेडकर पार्क पर एकदिवसीय अन्न-जल त्याग धरना किया गया। युवा समाजसेवी एवं सामाजिक नेता शुभम सेठ गोलूने समाज की उपेक्षा के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। शुभम ने अन्न और जल दोनों का पूर्ण त्याग कर प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।

 

धरने के माध्यम से प्रशासन के समक्ष स्वर्णकार समाज की दो प्रमुख और लंबे समय से लंबित मांगें रखी गईं। पहली मांग समाज के कुलदेवता और महान संत महाराज नरहरी दास जी की भव्य प्रतिमा को किसी सार्वजनिक स्थल पर स्थापित किए जाने की है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ा जा सके। दूसरी मांग चौक-नीचीबाग क्षेत्र में महाराज नरहरी दास स्मृति द्वारके निर्माण की है, जिससे समाज की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को स्थायी स्वरूप मिल सके।

 

धरना स्थल पर मीडिया से बातचीत करते हुए शुभम सेठ गोलूने कहा कि बीते एक माह से वे लगातार शासन-प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर ज्ञापन और पत्रों के माध्यम से अपनी मांगें रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि स्वर्णकार समाज का वाराणसी के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में अहम योगदान रहा है, इसके बावजूद अपने आराध्य देव के सम्मान के लिए आंदोलन का सहारा लेना दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

शुभम सेठ ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ही उनकी मांगों पर सकारात्मक और ठोस कार्रवाई नहीं की, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन समाज अपने सम्मान से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।

 

धरने के दौरान स्वर्णकार समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, युवा और गणमान्य नागरिक शास्त्री घाट पर पहुंचे और अनशन को अपना समर्थन दिया। इस बीच स्वर्णकार समाज की मांगों को लेकर भारत सरकार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और वाराणसी के सांसद को स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजा गया है। इसके अलावा जिलाधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा गया है और उसकी प्रतिलिपि स्पीड पोस्ट से प्रेषित की गई है। समाज को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय करेगा।

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