वाराणसी के दालमंडी इलाके में बहुप्रतीक्षित चौड़ीकरण परियोजना को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई दोबारा शुरू कर दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से 5 जनवरी तक दिया गया अल्टीमेटम समाप्त होने के बाद अब प्रशासन ने ज़मीनी स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को एडीएम सिटी, एसीपी और भारी पुलिस फोर्स के साथ प्रशासनिक अधिकारी दालमंडी गली पहुंचे और दूसरे चरण के तहत चिन्हित मकानों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
प्रशासनिक कार्रवाई के तहत बुधवार को सातवें मकान पर ध्वस्तीकरण का काम शुरू किया गया। इस दौरान पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों ने हथौड़े चलाकर निर्माण तोड़ना शुरू किया। इससे पहले नवंबर महीने में पहले चरण की कार्रवाई में छह मकानों को गिराया जा चुका था। दूसरे चरण में अब तक तीन मकानों को ध्वस्त किया जा चुका है। प्रशासन का कहना है कि आगे भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

ध्वस्तीकरण को देखते हुए पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। तीन थानों की पुलिस के करीब 150 जवान मौके पर तैनात रहे, जबकि पीएसी और पैरामिलिट्री फोर्स के लगभग 100 जवानों को रिजर्व में रखा गया। दालमंडी गली में बैरिकेडिंग कर आम लोगों और वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए ड्रोन कैमरों से भी पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई।
कार्रवाई से पहले पुलिस और पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों ने मुनादी कराकर दुकानदारों और स्थानीय लोगों से अपनी दुकानें बंद कर बाहर निकलने की अपील की। कुछ दुकानदारों ने विरोध जताने की कोशिश की, लेकिन भारी पुलिस बल को देखकर कोई खुलकर सामने नहीं आया। प्रशासन ने सभी को सुरक्षित दूरी पर हटाकर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी।

एसीपी दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि दालमंडी चौड़ीकरण की कार्रवाई बुधवार से फिर शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि आज तीन मकानों को तोड़े जाने की योजना थी, जिनमें से एक मकान को स्वयं मकान मालिक द्वारा तोड़ा जा रहा है, जबकि एक अन्य मकान का ध्वस्तीकरण प्रशासनिक टीम कर रही है। इसके बाद तीसरे मकान पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी में यह अभियान लगातार चलता रहेगा।
हालांकि, ध्वस्तीकरण से प्रभावित दुकानदारों और व्यापारियों में गहरा रोष और चिंता देखने को मिल रही है। रशीद अहमद खां, जिनकी दुकान सीके 43/13 भवन के निचले तल पर स्थित है, ने बताया कि उनकी दुकान करीब 100 साल पुरानी है और तीन पीढ़ियों से उनका परिवार इसी दुकान से रोज़ी-रोटी चला रहा है। उन्होंने कहा कि अचानक खाली कराने का अल्टीमेटम दिया गया, जिससे वे और उनका परिवार असमंजस में हैं कि अब कहां जाएं।

इसी तरह बनारस प्लास्टिक स्टोर के मालिक गुड्डू खां ने बताया कि जिस मकान को आज गिराया जा रहा है, उसमें उनकी दुकान थी। उन्हें करीब 15 दिन पहले दुकान खाली करने के लिए कहा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो मकान मालिक से कोई स्पष्ट बातचीत हुई और न ही अब तक किसी तरह का मुआवजा मिला है। उनका कहना है कि उनकी दुकान 100 साल से भी ज्यादा पुरानी थी और अचानक मिली सूचना से उनका पूरा कारोबार ठप हो गया है।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना के तहत कुल 186 मकानों को चिन्हित किया गया है। इनमें से अब तक केवल 40 मकानों की ही रजिस्ट्री हो पाई है। जिन लोगों ने अब तक अपनी रजिस्ट्री नहीं कराई है, उन्हें भविष्य में परेशानी उठानी पड़ सकती है। अधिकारियों का कहना है कि नवंबर के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अस्थायी रूप से रुकी थी, लेकिन अब सभी विभागों के साथ बैठक के बाद इसे दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि दालमंडी गली का चौड़ीकरण सरकार की प्राथमिकता में शामिल है और इसमें किसी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी को देखते हुए पीडब्ल्यूडी विभाग ने चौक थाना परिसर में अपना कैंप कार्यालय खोला है, जहां रजिस्ट्री और मुआवजे से जुड़ी प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है। रोज़ाना 15 से 20 मकान मालिक कैंप कार्यालय पहुंचकर जानकारी ले रहे हैं और आवश्यक दस्तावेज जमा कर रजिस्ट्री करवा रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों को मुआवजा मिल चुका है, उनसे एक सप्ताह के भीतर मकान खाली करने का अनुरोध किया गया था। अब जो लोग आदेश के बावजूद मकान खाली नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए पुलिस, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के बीच लगातार समन्वय बनाया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की बाधा को दूर किया जा सके।