वाराणसी। उत्तर प्रदेश में जारी हाड़कपाँती ठंड और शीत लहर के बीच, जहाँ आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है, वहीं वाराणसी की सामाजिक संस्था "खुशी की उड़ान" मानवता की नई इबारत लिख रही है। संस्था ने अपनी विशेष मुहिम "ओढ़ा दी जिंदगी" के तहत कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर बेसहारा लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।
वाराणसी रेलवे स्टेशन और उसके आस-पास के इलाकों में जब तापमान अपने निचले स्तर पर था, तब संस्था की संस्थापिका सारिका दुबे के नेतृत्व में महिला टीम ने सड़कों पर उतरकर सेवा कार्य किया। टीम ने अंधेरे में ढूंढ-ढूंढकर उन बुजुर्गों, दिव्यांगों, रिक्शा चालकों और बच्चों को कंबल ओढ़ाए, जो ठंड से कांप रहे थे। विशेष रूप से माघ मेले के लिए प्रयागराज जाने वाले उन तीर्थयात्रियों की मदद की गई, जो ट्रेन की प्रतीक्षा में खुले प्लेटफार्म या सड़क किनारे रात गुजारने को विवश थे।
स्टेशन पर तैनात पुलिस कर्मियों और गार्ड्स ने युवाओं के इस जज्बे की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। सुरक्षाकर्मियों का कहना था कि आज के दौर में जहाँ युवा संवेदनशीलता खोते जा रहे हैं, वहीं "खुशी की उड़ान" की टीम अर्धरात्रि में जरूरतमंदों की सेवा कर एक मिसाल पेश कर रही है। तीर्थयात्रियों के लिए यह कंबल किसी जीवनदान से कम नहीं था, क्योंकि खुले आसमान के नीचे बिना गर्म कपड़ों के रात काटना असंभव हो रहा था।
संस्थापिका सारिका दुबे ने इस मौके पर कहा, "हमारा उद्देश्य समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना है जो अभावों में जी रहा है। 'ओढ़ा दो जिंदगी' मुहिम अनवरत चलती रहेगी ताकि कोई भी बेसहारा ठंड की वजह से अपनी जान न गंवाए।"
प्रदीप जायसवाल ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि कंबल पाने के बाद बुजुर्गों और बच्चों के चेहरे पर जो मुस्कान आई, उससे मिलने वाला आत्मिक सुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
कंबल वितरण के इस पुनीत कार्य में संस्था के कोषाध्यक्ष चीतेश्वर सेठ, आकाश पाण्डेय, और राहुल पाण्डेय सहित टीम के अन्य सदस्य सक्रिय रूप से शामिल रहे। संस्था ने संकल्प लिया है कि जब तक शीत लहर का प्रकोप रहेगा, उनका यह सेवा अभियान जारी रहेगा।