अमेठी। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राज्य के विभाजन और पृथक पूर्वांचल के गठन की मांग ने जोर पकड़ लिया है। अमेठी स्थित ददन सदन भवन में आयोजित खिचड़ी भोज एवं स्नेह मिलन समारोह के दौरान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश के मौजूदा विशाल स्वरूप में सुशासन की स्थापना करना अब व्यावहारिक नहीं रह गया है।
डॉ. संजय सिंह ने मीडिया से मुखातिब होते हुए तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश की जनसंख्या विश्व के पांचवें सबसे बड़े देश से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और अच्छी शासन व्यवस्था (सुशासन) इतने विशाल भौगोलिक और जनसांख्यिकीय ढांचे में प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाते। डॉ. सिंह ने एक नए नक्शे का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि प्रदेश के 8 मंडलों के 28 जिलों को काट कर एक अलग 'पूर्वांचल राज्य' का गठन किया जाए।
उनके अनुसार, यह प्रस्तावित राज्य लगभग 7.98 करोड़ की आबादी वाला होगा, जो जनसंख्या के लिहाज से देश का 14वां सबसे बड़ा राज्य बनेगा। इस मुहिम को धार देने के लिए 'पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच' के जरिए जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा।
संसाधन संपन्न लेकिन विकास से वंचित
इस अवसर पर पूर्व मंत्री और भाजपा नेत्री डॉ. अमीता सिंह ने पूर्वांचल की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषाई और सांस्कृतिक रूप से पूर्वांचल की अपनी एक अलग और सशक्त पहचान है। यह क्षेत्र केवल एक बड़ा बाजार ही नहीं है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और कुशल मानव श्रम का भंडार भी है। इसके बावजूद, लंबे समय से प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह क्षेत्र पिछड़ गया है।
डॉ. अमीता सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास न होने और कृषि में आधुनिक सुधारों की कमी के कारण यहां से पलायन एक गंभीर समस्या बन चुका है। उन्होंने बाढ़ और सूखे की दोहरी मार का जिक्र करते हुए कहा कि नेपाल से आने वाली नदियों के जल प्रबंधन के लिए कोई ठोस नीति नहीं है, जिससे एक तरफ बाढ़ तबाही मचाती है तो दूसरी तरफ नहरें सूखी रहती हैं।
पर्यटन और ऊर्जा का पावर हाउस बनने की क्षमता
अलग राज्य की वकालत करते हुए डॉ. अमीता सिंह ने पूर्वांचल की छिपी हुई संभावनाओं को भी गिनाया। उन्होंने बताया कि:
ऊर्जा और खनिज: मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे जिले खनिज संपदा से भरे हैं और यह क्षेत्र देश का एक बड़ा विद्युत उत्पादन केंद्र है।
आध्यात्मिक पर्यटन: अयोध्या, काशी और प्रयागराज जैसे तीर्थस्थल इसी भू-भाग में आते हैं।
बौद्ध सर्किट: सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु, लुम्बिनी और श्रावस्ती जैसे स्थल अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और विदेशी मुद्रा अर्जन का बड़ा जरिया बन सकते हैं।
मानव संसाधन: दुनिया की बड़ी आईटी कंपनियों में पूर्वांचल के युवाओं की भारी तादाद है।
अंत में, दोनों नेताओं ने जोर देकर कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूर्वांचल के लिए एक पृथक प्रशासनिक ढांचा और विशेष केंद्रीय नीतियां अनिवार्य हैं। एकजुट होकर ही इस मांग को दिल्ली तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।