वाराणसी। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में महानगर और जिला अध्यक्षों की घोषणा कर दी गई है। इसी कड़ी में वाराणसी महानगर अध्यक्ष पद के लिए प्रदीप अग्रहरि को जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले विद्यासागर राय इस पद पर थे। हालांकि, जिले के बीजेपी अध्यक्ष पद का अब तक ऐलान नहीं हुआ है।
वाराणसी को भारतीय राजनीति का केंद्र माना जाता है, क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। लेकिन इस बार भाजपा की आंतरिक राजनीति में जातीय समीकरणों को लेकर बहस छिड़ गई है। खासकर सोनार समुदाय को लगातार नजरअंदाज किए जाने का मुद्दा जोर पकड़ रहा है।
सोनार समाज को राजनीतिक भागीदारी क्यों नहीं?
भारतीय जनता पार्टी ने अपने नारे “सबका साथ, सबका विकास” के तहत हर वर्ग और समुदाय को प्रतिनिधित्व देने की बात कही थी। लेकिन वाराणसी के राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो सोनार समुदाय की उपेक्षा स्पष्ट रूप से नजर आ रही है। इस समाज के नेताओं को कोई भी महत्वपूर्ण पद नहीं दिया गया, जबकि वाराणसी लोकसभा क्षेत्र का चुनावी समीकरण जातीय आधार पर भी प्रभावित होता है।
वाराणसी की सामाजिक संरचना में कुर्मी, ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार, बनिया और मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में हैं। इनमें से लगभग सभी को किसी न किसी रूप में भाजपा की स्थानीय इकाई में प्रतिनिधित्व मिला है, लेकिन सोनार समाज को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है।
बनारस में सोनार समाज की डेढ़ लाख की आबादी
सोनार नरहरि सेना के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार वर्मा ने स्वर्णकार समाज की उपेक्षा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि स्वर्णकार समाज वाराणसी और खासकर पूर्वांचल में आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत स्थिति रखता है। बनारस जनपद में इस समाज की आबादी डेढ़ लाख से अधिक बताई जाती है। लेकिन इसके बावजूद भाजपा संगठन में इस समाज के किसी नेता को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
भाजपा में सोनार समाज की अनदेखी: आंकड़ों पर एक नजर
अगर वाराणसी की मौजूदा राजनीति पर नजर डालें तो भाजपा और उसके सहयोगी दलों से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों में सोनार समाज की कोई भागीदारी नहीं दिखती।
वाराणसी जिले के प्रमुख भाजपा जनप्रतिनिधि:
• वाराणसी दक्षिणी विधानसभा: डॉ. नीलकंठ तिवारी (ब्राह्मण)
• कैंट विधानसभा: सौरभ श्रीवास्तव (सवर्ण
• रोहनिया विधानसभा: सुनील पटेल (अपना दल – एस)
• शहर उत्तरी विधानसभा: रविंद्र जायसवाल (बनिया)
• अजगरा विधानसभा: त्रिभुवनराम (एससी)
• पिंडरा विधानसभा: डॉ. अवधेश सिंह (भूमिहार)
• सेवापुरी विधानसभा: नीलरतन पटेल (अपना दल – एस)
• शिवपुर विधानसभा: अनिल राजभर (राजभर)
अन्य भाजपा पदाधिकारी:
• महामहिम राज्यपाल, असम: लक्ष्मण आचार्य
• मंत्री: दयाशंकर मिश्र दयालु, अनिल राजभर, रविंद्र जायसवाल
• जिला अध्यक्ष: हंसराज विश्वकर्मा
• जिला पंचायत अध्यक्ष: पूनम मौर्या
• महानगर अध्यक्ष: प्रदीप अग्रहरि
• मेयर: अशोक तिवारी
• क्षेत्रीय अध्यक्ष: दिलीप पटेल
• प्रदेश मंत्री: मीना चौबे, शंकर गिरी
इस पूरी सूची में कहीं भी सोनार समाज के किसी नेता को कोई महत्वपूर्ण पद नहीं दिया गया है।
सोनार समाज में बढ़ रही नाराजगी
धर्मेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सोनार समाज के लोगों ने भाजपा की राजनीति में भागीदारी बढ़ाने की मांग उठाई है, लेकिन पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। यह समुदाय अपने सामाजिक और राजनीतिक हक की मांग कर रहा है।
सोनार नेताओं का कहना है कि पार्टी अन्य जातियों को तो महत्व देती है, लेकिन सोनारों को केवल "वोट बैंक" के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। भाजपा के स्थानीय संगठन और नेतृत्व पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि वे सोनार समाज के मुद्दों को हल करने में कोई सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं।
राजनीतिक उपेक्षा का कारण क्या है?
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि सोनार समाज की उपेक्षा के पीछे कुछ अहम कारण हो सकते हैं:
1. अन्य जातियों का दबदबा – ब्राह्मण, भूमिहार, कुर्मी और राजभर समाज के नेता भाजपा संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं।
2. वोट बैंक की राजनीति – भाजपा मानती है कि सोनार समाज स्वाभाविक रूप से भाजपा का समर्थक है, इसलिए उसे विशेष प्रतिनिधित्व देने की जरूरत नहीं है।
3. पार्टी के अंदरूनी मतभेद – भाजपा में प्रभावी नेतृत्व और गुटबाजी के कारण भी सोनार समाज के नेताओं को उच्च पदों पर नहीं रखा जाता।
भाजपा के लिए खतरा बन सकता है सोनार समाज का असंतोष
अगर भाजपा ने समय रहते इस मुद्दे को नहीं सुलझाया तो यह असंतोष पार्टी के लिए खतरा बन सकता है। यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सोनार समाज भाजपा से दूरी बना सकता है और किसी अन्य दल का समर्थन कर सकता है। धर्मेंद्र वर्मा का कहना है कि अगर भाजपा नेतृत्व ने जल्द ही इस मामले को नहीं सुलझाया तो समुदाय के लोग आने वाले चुनावों में भाजपा के खिलाफ रणनीति बनाएंगे।
वाराणसी में भाजपा जिला अध्यक्ष पद पर भी संशय
वाराणसी भाजपा के जिला अध्यक्ष पद को अब तक होल्ड पर रखा गया है। मौजूदा जिला अध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा हैं, जो लगातार तीसरी बार इस पद को संभाल रहे हैं। इसके अलावा वे विधान परिषद सदस्य (MLC) भी हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस बार जिला अध्यक्ष पद पर किसी नए चेहरे को मौका देती है या फिर हंसराज विश्वकर्मा को ही बनाए रखती है।