'मैं एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा...' पर्दे पर उतरी 1971 के उस जांबाज की कहानी जिसे जीते जी मिला 'परमवीर', लहूलुहान मेजर से कांप उठा था पाकिस्तान

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नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जब पूरा देश देशभक्ति के रंग में रंगा है, सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म 'बॉर्डर 2' ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। इस फिल्म में अभिनेता वरुण धवन ने 1971 के युद्ध के महानायक और परमवीर चक्र विजेता मेजर होशियार सिंह दहिया का किरदार निभाया है। वरुण के अभिनय और मेजर होशियार सिंह की वीरता की कहानी ने एक बार फिर भारतीय सेना के बलिदान को जन-जन तक पहुँचा दिया है।

 

घायल शेर की तरह डटे रहे मेजर होशियार सिंह

 

1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान 'बसंतर की लड़ाई' भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे खूनी और निर्णायक संघर्षों में से एक थी। 16-17 दिसंबर 1971 को शकरगढ़ सेक्टर के जरपाल और लोडल इलाके में मेजर होशियार सिंह अपनी कंपनी का नेतृत्व कर रहे थे।

 

युद्ध के दौरान जब पाकिस्तानी सेना ने भीषण गोलाबारी शुरू की और मेजर के गनर शहीद हो गए, तब घायल होने के बावजूद उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया।

 

·  खुद संभाली कमान: मेजर ने स्वयं मशीनगन संभाली और दुश्मन पर मौत बनकर टूट पड़े।

 

बढ़ाया मनोबल: वे गंभीर रूप से घायल थे, शरीर से खून बह रहा था, लेकिन वे एक खाई से दूसरी खाई तक दौड़ते रहे ताकि उनके जवानों का हौसला न टूटे।

 

दुश्मन का विनाश: मेजर की इस जांबाजी का नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान की पूरी बटालियन बिखर गई और भारत ने वेस्टर्न फ्रंट पर अपनी स्थिति अभेद्य कर ली। इस युद्ध में 300 से ज्यादा पाक सैनिक मारे गए और दर्जनों टैंक राख के ढेर में बदल गए।

 

जीते जी मिला 'सर्वोच्च वीरता का चक्र'

 

मेजर होशियार सिंह उन चुनिंदा वीरों में शामिल थे, जिन्हें परमवीर चक्र (PVC) जीते जी प्रदान किया गया था। भारत का यह सर्वोच्च सैन्य सम्मान अब तक मात्र 21 जांबाजों को मिला है। यह पदक युद्ध के मैदान में प्रदर्शित 'असाधारण वीरता' का प्रतीक है। वरुण धवन ने फिल्म में जिस संजीदगी से इस किरदार को निभाया है, वह मेजर की विरासत को सच्ची श्रद्धांजलि दे रहा है।

 

परमवीर चक्र: अमर बलिदानों की गाथा

 

भारतीय सेना का यह सर्वोच्च सम्मान अब तक 21 बार दिया जा चुका है, जिनमें से 14 सम्मान मरणोपरांत दिए गए हैं। 16 पुरस्कार भारत-पाक संघर्षों के लिए दिए गए हैं।

 

प्रमुख नायक

रेजिमेंट

ऑपरेशन/युद्ध

मेजर सोमनाथ शर्मा

4 कुमाऊँ

1947-48 (प्रथम विजेता)

लांस नायक करम सिंह

1 सिख

1948 (प्रथम जीवित विजेता)

कैप्टन विक्रम बत्रा

13 JAK Rif

1999 कारगिल (ये दिल मांगे मोर)

मेजर होशियार सिंह

द ग्रेनेडियर्स

1971 भारत-पाक युद्ध

 

"दुश्मन हमसे केवल 50 गज की दूरी पर है। मैं एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा।" मेजर सोमनाथ शर्मा (शहीद होने से पहले का अंतिम संदेश)

 

21 नायकों की सूची: जिनसे थर्राता है दुश्मन

 

देश के इन 21 सपूतों ने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाई:

 

1. मेजर सोमनाथ शर्मा, 2. नायक जदुनाथ सिंह, 3. सेकंड लेफ्टिनेंट रामा राघोबा राणे, 4. लांस नायक करम सिंह, 5. पीरू सिंह शेखावत, 6. कैप्टन गुरबचन सिंह सालारिया, 7. मेजर धन सिंह थापा, 8. सूबेदार जोगिंदर सिंह, 9. मेजर शैतान सिंह, 10. अब्दुल हमीद, 11. लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर तारापोर, 12. लांस नायक अल्बर्ट एक्का, 13. सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल, 14. मेजर होशियार सिंह दहिया, 15. निर्मलजीत सिंह सेखों, 16. मेजर रामास्वामी परमेस्वरन, 17. बाना सिंह, 18. योगेंद्र सिंह यादव, 19. मनोज कुमार पांडे, 20. संजय कुमार, 21. कैप्टन विक्रम बत्रा।

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