वाराणसी: कर्णघंटा में 3 करोड़ की सोना चोरी का पर्दाफाश, पांच गिरफ्तार, बाहरी कारीगरों ने तीन महीने पहले की थी प्लानिंग, बनवा ली थी डुप्लीकेट चाबी, ऐसे हुआ पर्दाफाश

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वाराणसी। चौक थाना क्षेत्र के कर्णघंटा इलाके में 5 जनवरी को हुई करीब दो किलो से अधिक सोने की बड़ी चोरी का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए चोरी गया पूरा सोना बरामद कर लिया है। बरामद सोने का वजन 2 किलो 122 ग्राम बताया गया है, जिसकी बाजार कीमत तीन करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अब तक की बनारस पुलिस की सबसे बड़ी सोना बरामदगी मानी जा रही है।

 

गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में दीपेश चौहान निवासी बारी गांव, थाना मडियाहू, जौनपुर, विकास बेनवंशी निवासी मौधा, थाना खानपुर, गाजीपुर, शुभम विश्वकर्मा निवासी मौधा, थाना खानपुर, गाजीपुर, सैनुद्दीन अंसारी निवासी मौधा, थाना खानपुर, गाजीपुर और तारक घोराई निवासी गोपालपुर, थाना दासपुर, पश्चिमी मेदिनीपुर (पश्चिम बंगाल) शामिल हैं। पुलिस सभी आरोपियों से आगे की पूछताछ कर रही है।

 

एडीसीपी सरवन टी ने बताया कि चौक थाना क्षेत्र के दयाशंकर कटरे के ऊपरी तल पर मुंबई निवासी दिवाकर राणा ने दो फ्लैट किराए पर ले रखे हैं। इन फ्लैट्स में सोना गलाने और आभूषण तैयार करने का कार्य होता है। 5 जनवरी को कारखाने से बड़ी मात्रा में सोना गायब पाया गया, जिसके बाद पीड़ित ने चौक थाने में चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। प्रारंभिक जांच के दौरान पीड़ित ने केयरटेकर तारक घोराई पर संदेह जताया था।

 

पुलिस ने जब केयरटेकर से गहन पूछताछ की तो पूरी साजिश सामने आ गई। पूछताछ में तारक घोराई ने स्वीकार किया कि चोरी की घटना को बाहर से आए किसी गिरोह ने नहीं, बल्कि मकान में रहने वाले लोगों ने ही मिलकर अंजाम दिया था। उसने बताया कि उसके साथ रहने वाले दोस्त भी इस वारदात में शामिल थे।

 

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि चोरी की योजना करीब तीन महीने पहले ही बना ली गई थी। एडीसीपी के अनुसार, तारक घोराई और विकास बेनवंशी इस साजिश के मुख्य योजनाकार थे। उन्होंने पहले से तय कर लिया था कि जब कारखाने में सोने का स्टॉक अधिक मात्रा में आएगा, तभी चोरी की जाएगी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि खरमास समाप्त होने के बाद लगन का सीजन शुरू होने वाला था, जिसके चलते गहनों के निर्माण के लिए मुंबई से भारी मात्रा में सोना मंगाया गया था।

 

पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने डुप्लीकेट चाबी बनवाई। घटना के दिन तारक और विकास आजमगढ़ पार्टी में जाने का बहाना बनाकर बाहर चले गए, जबकि सैनुद्दीन ने उस कमरे का शीशा तोड़कर सामान बिखेर दिया, ताकि लगे कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने जबरन चोरी की है। हालांकि, कारखाने में लगे सीसीटीवी कैमरों ने पूरी घटना को रिकॉर्ड कर लिया। फुटेज के आधार पर पुलिस ने साजिश का खुलासा किया और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

 

पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड शुभम, तारक और विकास थे, जबकि दीपेश चौहान ने डुप्लीकेट चाबी बनवाने में अहम भूमिका निभाई थी। पुलिस अब सभी आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है।

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