वाराणसी। बड़ागांव थाना क्षेत्र के दयालपुर गांव के पास 25 दिसंबर को हुई 14 वर्षीय समीर सिंह की हत्या और रामू यादव पर जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरी घटना महज एक "गाड़ी टकराने" और "रास्ते में पेशाब करने" जैसे तुच्छ विवाद से शुरू हुई थी, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया।
क्या थी पूरी घटना?
डीसीपी गोमती जोन, आकाश पटेल ने मामले का विवरण देते हुए बताया कि 25 दिसंबर की शाम अभियुक्त करन प्रजापति, प्रेम शंकर पटेल और शुभम मौर्य अपने दो अन्य साथियों (पवन और आकाश पाल) के साथ जंसा इलाके से शराब पीकर लौट रहे थे। रास्ते में दयालपुर गांव के पास वे सड़क किनारे रुके। तभी वहां से गुजर रहे रामू यादव और अभिषेक यादव की गाड़ी आरोपियों से टकरा गई।

नशे में धुत बदमाशों ने इस मामूली बात पर मारपीट शुरू कर दी। जब रामू यादव ने शोर मचाया और ग्रामीण जुटने लगे, तो पकड़े जाने के डर से बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इसी दौरान वहां से गुजर रहा समीर सिंह बीच-बचाव करने या स्थिति समझने पहुंचा था, जिसे बदमाशों ने बेरहमी से गोली मार दी और उसकी बाइक छीनकर फरार हो गए। समीर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि रामू गंभीर रूप से घायल हो गया।
जांच में आई चुनौतियां और पुलिस की रणनीति
पुलिस के लिए यह मामला सुलझाना एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि:
· कोई सीधा संबंध नहीं: मृतक समीर सिंह और घायल रामू यादव के बीच कोई पूर्व परिचय नहीं था।
· अज्ञात हमलावर: पीड़ितों के पास हमलावरों की कोई पहचान नहीं थी।
· तकनीकी बाधा: क्षेत्र के सोलर सीसीटीवी कैमरे बादलों के कारण चार्ज न होने से बंद थे।
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने हार नहीं मानी। टीम ने लगभग 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले और 100 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ की। आखिरकार, घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक निजी कैमरे में धुंधली तस्वीरें और कुछ महत्वपूर्ण ऑडियो साक्ष्य मिले, जिससे पुलिस को सुराग मिला।
गिरफ्तार अभियुक्त और उनका आपराधिक इतिहास
पुलिस ने घेराबंदी कर बड़ागांव निवासी करन प्रजापति, प्रेम शंकर पटेल और शुभम मौर्य को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में पांच अन्य नामों का भी खुलासा हुआ है, जिनमें संदीप यादव, मनीष यादव, दीपक और पवन पाल शामिल हैं।
पकड़े गए और वांछित अभियुक्त शातिर अपराधी हैं:
1. संदीप यादव: इसके खिलाफ हत्या सहित 10 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
2. पवन कुमार पाल: इस पर 6 मुकदमे दर्ज हैं और यह पहले भी हत्या के मामले में जेल जा चुका है।
3. दीपक और मनीष: इन पर भी दो-दो आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं।
परिजनों ने किया था प्रदर्शन
बता दें कि समीर सिंह की हत्या के बाद से ही ग्रामीणों और परिजनों में भारी रोष था। गिरफ्तारी में देरी होने पर परिजनों ने गुरुवार को थाने पर धरना प्रदर्शन भी किया था। पुलिस की इस सफलता के बाद अब क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है, हालांकि फरार 5 अन्य आरोपियों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है।