वाराणसी: सड़क से बच्चा चुराने वाले गैंग के 7 सदस्यों को उम्रकैद, मास्टरमाइंड के साथ शामिल थी 3 महिलाएं, राजस्थान, झारखंड और बिहार में होती थी तस्करी

https://admin.thefrontfaceindia.in/uploads/1097575809_varanasi-child-kidnapping-gang-seven-get-life-term.jpg

वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बच्चा चोरी और मानव तस्करी में सक्रिय गैंग के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने लंबी सुनवाई और सभी साक्ष्यों के अध्ययन के बाद गिरोह के 7 सदस्यों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक पर 15-15 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। वहीं, अपर्याप्त साक्ष्यों के चलते 8 आरोपियों को संदेह का लाभ मिला और वे बरी हो गए।

 

अभियोजन के अनुसार, पुलिस की चार्जशीट में कुल 16 लोगों को आरोपी बनाया गया था। गिरोह के 10 सदस्यों की गिरफ्तारी झारखंड, राजस्थान और वाराणसी से की गई थी। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने तीन लापता बच्चों को सुरक्षित बरामद किया। इस चाइल्ड-ट्रैफिकिंग नेटवर्क में मास्टरमाइंड के साथ तीन महिलाएं भी शामिल थीं।

 

फास्ट ट्रैक कोर्ट के एडीजे कुलदीप सिंह ने जिन आरोपियों को दोषी करार दिया, उनमें संतोष गुप्ता, मनीष जैन, महेश राणा, मुकेश पंडित, रामलाल के पुत्र महेश राणा, सीखा और सुनीता देवी शामिल हैं। सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषी कोर्टरूम में भावुक होकर रोते हुए दिखाई दिए। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज गुप्ता ने प्रभावी बहस की।

 

कैसे खुला था गैंग का राज

 

मामला 14 मई की रात का है। भेलूपुर क्षेत्र के रवींद्रपुरी स्थित रामचंद्र शुक्ल चौराहे पर चार वर्षीय बच्चा अपने माता-पिता के साथ सो रहा था। इसी दौरान कार सवार बदमाशों ने उसे उठाकर फरार हो गए। परिवार जन दो दिनों तक बच्चे की तलाश में भटकते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

 

इसी बीच, दरोगा शिवम श्रीवास्तव को इस घटना की जानकारी मिली। उन्होंने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो एक संदिग्ध कार का पता चला जिसमें बच्चा उठाकर ले जाया गया था। फुटेज के आधार पर कार मालिक तक पहुंचने के बाद पता चला कि वाहन किराए पर दिया गया था और मालिक का घटना से कोई संबंध नहीं था।

 

जांच में मंडुआडीह निवासी ड्राइवर संतोष गुप्ता और उसका साथी विनय मिश्रा पकड़े गए। जांच में सामने आया कि विनय ने ही बच्चे को माता-पिता के बीच से उठाया था। इस सुराग से पुलिस ने पूरे गैंग का पर्दाफाश कर लिया।

 

राजस्थान-झारखंड कनेक्शन

 

पूछताछ के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि यह नेटवर्क राजस्थान, झारखंड और बिहार में सक्रिय दलालों के जरिए मासूम बच्चों को दो से पांच लाख रुपये में निसंतान दंपतियों को बेचता था। इसी कड़ी में झारखंड के हजारीबाग से यशोदा देवी को एक बच्चे के साथ गिरफ्तार किया गया था, जिसे विंध्याचल से अगवा किया गया था। वहीं, भीलवाड़ा (राजस्थान) से पकड़े गए भंवरलाल के बारे में पता चला कि वह सात बच्चों के अपहरण में शामिल रहा है।

इसे भी पढ़ें

Latest News