वाराणसी: 8 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाले ‘वहशी’ को फांसी की सजा; 11 महीने के भीतर अदालत ने किया इंसाफ, एक साल पहले बोरे में मिली थी लाश

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वाराणसी न्याय में देरी को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों के बीच वाराणसी की एक विशेष अदालत ने त्वरित न्याय की एक ऐसी नजीर पेश की है, जो अपराधियों के जेहन में खौफ पैदा करने के लिए काफी है। मात्र 11 महीने की अदालती कार्रवाई के बाद, रामनगर में आठ साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या के दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है। विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) विनोद कुमार की अदालत ने इस अपराध को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (दुर्लभतम) की श्रेणी में रखते हुए दोषी को मानवता के लिए कलंक और 'वहशी' करार दिया।

 

क्रिसमस की पूर्व संध्या पर पसरा था मातम

 

घटना पिछले साल 24 दिसंबर 2024 की है, जब पूरा शहर त्योहार की तैयारियों में जुटा था। रामनगर थाना क्षेत्र के सुजाबाद के रहने वाले एक ऑटो चालक का परिवार अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त था। शाम के करीब 6:30 बजे, ऑटो चालक की आठ साल की बेटी घर से कुछ ही दूरी पर स्थित दुकान से मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती खरीदने निकली थी। लेकिन वह वापस नहीं लौटी।

 

देर रात तक जब बच्ची घर नहीं पहुंची, तो परिजनों की बेचैनी बढ़ गई। पिता ने रामनगर पुलिस को सूचना दी। अगली सुबह जो मंजर सामने आया, उसने पूरे इलाके को दहला दिया। पास ही स्थित बहादुर प्राथमिक विद्यालय की चारदीवारी के पीछे, कूड़े के ढेर में एक बोरी मिली, जिसके भीतर मासूम का शव ठूंसा गया था। बच्ची के साथ हुई हैवानियत के निशान उसके शरीर पर साफ दिखाई दे रहे थे।

 

तीसरी आंख ने खोला राज: पुलिस की सराहनीय भूमिका

 

इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा करने में वाराणसी पुलिस की भूमिका और तत्परता अत्यंत सराहनीय रही। थाना प्रभारी राजू सिंह ने बिना वक्त गंवाए इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। आधुनिक तकनीक और पुलिस की सूझबूझ ने कातिल को बेनकाब कर दिया।

 

एक स्थानीय दुकानदार नसीम ने पुष्टि की कि बच्ची अगरबत्ती लेने आई थी। सीसीटीवी फुटेज में बच्ची शाम 7:15 बजे दुकान की ओर जाती और 7:30 बजे वापस लौटती दिखी। लेकिन उसी फुटेज में एक और खौफनाक दृश्य कैद थापड़ोस में रहने वाला युवक इरशाद बच्ची को जबरन पकड़कर एक गली में खींचता हुआ दिखाई दिया।

 

इस सुराग के मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी। घटना के अगले ही दिन, 25 दिसंबर को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद इरशाद को गिरफ्तार कर लिया। इस मुठभेड़ में भागने की कोशिश कर रहे आरोपी के पैर में गोली भी लगी थी। पुलिस की तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटना के मात्र दो हफ्ते के भीतर, यानी 7 जनवरी 2025 को अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया गया था।

 

दरिंदगी की इंतहा: पत्थर से कूच दिया था सिर

 

पुलिस पूछताछ में इरशाद ने जो कबूलनामा किया, उसे सुनकर किसी भी इंसान की रूह कांप जाए। उसने बताया कि वह नशे की हालत में मोहल्ले में घूम रहा था जब उसकी नजर अकेली बच्ची पर पड़ी। हवस का शिकार बनाने की नीयत से उसने बच्ची का मुंह दबाया और उसे एक सुनसान जगह पर खींच ले गया।

 

जब मासूम ने खुद को बचाने के लिए चीखने-चिल्लाने की कोशिश की, तो इरशाद ने पकड़े जाने के डर से दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। उसने बच्ची के ही स्कार्फ से उसका गला घोंट दिया। लेकिन उसकी हैवानियत यहीं नहीं रुकी। बच्ची की मौत सुनिश्चित करने के लिए उसने पास पड़े एक भारी पत्थर से उसके सिर को बुरी तरह कूच दिया। इसके बाद उसने शव को एक बोरी में भरकर स्कूल के पीछे फेंक दिया और अपने घर जाकर सो गया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल पत्थर भी बरामद किया।

 

अदालत की टिप्पणी: "यह मनुष्य का काम नहीं हो सकता"

 

मुकदमे की सुनवाई 11 फरवरी से 7 नवंबर तक चली। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक संदीप जायसवाल ने जोरदार पैरवी की। मामले में विवेचक राजू सिंह समेत कुल सात गवाह पेश किए गए।

 

मंगलवार, 18 नवंबर को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश विनोद कुमार ने तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "आठ साल की बच्ची के साथ ऐसा जघन्य अपराध कोई मनुष्य नहीं कर सकता। यह किसी 'वहशी' का ही काम हो सकता है। ऐसा व्यक्ति समाज के लिए एक नासूर और खतरा है।" अदालत ने कहा कि मासूम ने जिस असहनीय पीड़ा को सहा होगा, उसकी कल्पना मात्र से सिहरन होती है। इसलिए, आजीवन कारावास की सजा ऐसे अपराधी के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने इरशाद को मृत्युदंड के साथ-साथ 60,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया, जो पीड़ित पिता को दिया जाएगा।

 

पिता का दर्द: "आज कलेजे को ठंडक मिली"

 

फैसले के बाद कोर्ट के बाहर मौजूद मृतका के पिता की आंखों में आंसू थे, लेकिन ये आंसू न्याय मिलने की तसल्ली के थे। एक ऑटो चालक के रूप में जीवन यापन करने वाले पिता ने कहा, "पड़ोसी होने के बावजूद इरशाद ने जो घिनौना काम किया, उसने हमारे हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर दिया। हम उस सदमे से आज तक नहीं उबर पाए हैं। लेकिन आज उसे मौत की सजा मिलते देख मेरे कलेजे को ठंडक मिली है। मेरी बेटी को वापस तो नहीं लाया जा सकता, लेकिन अदालत ने जो न्याय किया है, उससे उसकी आत्मा को शांति मिलेगी।"

 

घटनाक्रम एक नजर में (फैक्ट फाइल):

 

·         वारदात: 24 दिसंबर 2024 (रामनगर, वाराणसी)

 

·         गिरफ्तारी: 25 दिसंबर 2024 (मुठभेड़ के बाद)

 

·         आरोप पत्र दाखिल: 7 जनवरी 2025 (मात्र 14 दिन में)

 

·         सुनवाई की अवधि: 11 फरवरी 2025 से 7 नवंबर 2025 तक

 

·         फैसला: 18 नवंबर 2025 (फांसी की सजा)

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